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नसीरुद्दीन शाह के नाम खुला ख़त, जिन्न को दोबारा बोतल में बंद करने का दायित्व हर संवेदनशील नागरिक का है !

-हृदय नाथ डियर नसीरुद्दीन, मैं आपको बधाई देता हूं कि परेशानी के आलम में भी आप ने होश हवास कायम रखा और बिना किसी झिझक और डर के मन की बा...
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प्यारी दीदी के नाम चिट्ठी, 'मैंने इस ज़िन्दगी को खुद चुना है, मुझे अपना मुक़दमा खुद लड़ना होगा'

- आशुतोष तिवारी प्यारी दीदी,  आज जब मैंने सुबह खुद को शीशे में देखा, मुझे यकीन नहीं हुआ कि क्या मैं वही लड़का हूँ, जिसे तुम अपना भाई कह...
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अंग्रेज सरकार के जुल्मों के खिलाफ लार्ड लिनलिथगो को लिखी गई लोहिया की यह चिट्ठी ऐतिहासिक दस्तावेज है

प्रिय लॉर्ड लिनलिथगो, मैं नहीं जानता कि मैं आपको यह क्यों लिख रहा हूँ? मैं आपकी व्यवस्था से कुछ भी अपेक्षा नहीं रखता। घूसखोरी और कत्लेआम...
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प्यार का पहला ख़त, तुम्हें देखने के बाद तो मेरा जीना ही मुश्किल हो गया है !

- अतुल कुमार पांडेय ज़िन्दगी के कई शेड हैं. कभी ख़ुशी है, कभी गम, कभी नाराज़गी तो कभी कॉमेडी. अंशुमन जब छोटा था, तभी माँ-बाप गुज़र गए. जवा...
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मोहन भागवत को खुला ख़त, RSS कभी देश की बुनियादी समस्याओं पर बात क्योंं नहीं करता?

-शशि शेखर आदरणीय भागवत जी,  सादर प्रणाम,  कुछ कठिन सवाल पूछने की हिम्मत कर रहा हूं. अभयदान मिलेगा, ऐसी उम्मीद है.  आपकी संस्था दु...
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डियर दोस्त, अपने पर ही फिदा हो जाना और कभी निराश होकर खुद से ही रूठ जाना

-आशुतोष तिवारी डियर दोस्त, मैं जब यह लिख रहा हूँ, तुम मेरे सामने नहीं हो। तुम कुछ महीनों उस डेस्क के आस पास भी नहीं होगी, जो छुट्...
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इतनी क्रूरता कहां से आ गई कि एक घायल पुलिस अधिकारी को घेर-घेर कर मार दिया गया?

-आशुतोष तिवारी मेरे देशवासियों !  इंस्पेक्टर सुबोध की हत्या पर एक रिपोर्ट पढ़ रहा था। खून जम गया। सुबोध दंगाइयों के साथ पहली झड़प ...
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लिखते हुए निराश नहीं हूं, लेकिन मैं तुम्हें कभी नहीं बताऊंगा कि मैंने यह तुम्हारे लिए लिखा है

-आशुतोष तिवारी मेरी प्रिय, तुम आज यहां नहीं हो। तुम कल भी यहां नहीं होगी, जब मैं कमरा नम्बर 401 में तुम्हारी स्मृतियों के किस्से कुछ उ...
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