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आईबीएन पर दिये इंटरव्यू पर स‌नी लियोनी को अमोल पालेकर की पत्नी की चिट्ठी

अंग्रेजी न्यूज चैनल सीएनएन-आईबीएन पर भूपेंद्र चौबे ने स‌नी लियोनी का एक इंटरव्यू लिया था। इंटरव्यू के दौरान पूछे गये स‌वालों को लेकर भूपेंद्र चौबे की काफी आलोचना हुई थी और स‌नी लियोनी ने जिस स‌हजता स‌े स‌ारे स‌वालों के जवाब दिये उस‌के लिए स‌ोशल मीडिया पर उनकी काफी तारीफ हुई। इसी इंटरव्यू को लेकर अमोल पालेकर की पत्नी स‌ंध्या गोखले ने स‌नी को एक चिट्ठी लिखी है।

हेलो सनी,
नेशनल टेलिविजन पर इंटरव्यू लेने वालों के बेवकूफाना सवालों का जिस धैर्य और सम्मान के साथ आपने जवाब दिया है, उसके कारण मैं यह पत्र लिखने पर मजबूर हो गई हूं। वह आपकी मौजूदगी को नकारने की कोशिश में थे और उनमें खुल्लम-खुल्ला स्त्री-द्वेष की भावना नज़र आ रही थी। वह निजी लालच और सांस्कृतिक हीनभावनाओं के बीच बिखरे हुुए से नजर आ रहे थे।

अपने पहले ही सवाल में उनका अजेंडा साफ हो गया था। वह एक 'अनैतिक काम' के बारे में उस इंसान से स्वीकार करवाना चाहते थे, जो कि 'शर्मनाक' सेक्स ऑब्जेक्ट के तौर पर इतना बिकाऊ रहा है। सवाल के पीछे उनका मकसद सबसे अधिक टीआरपी पाना था। वह सबके सामने आपको कमजोर साबित करने की कोशिश कर रहे थे। शायद वह आप पर दया करने की पहल करने का दिखावा कर रहे थे। हम सबने देखा कि किस तरह वह आपके पास्ट के चीथड़े उड़ाकर खुद अपराधी बन चुके थे।

आपने उन्हें नहीं कहा कि वह खुद उन सब लोगों की नुमाइंदगी कर रहे हैं, जो कि इस लंबे सफर में आपके साथ रहे, लेकिन खुलकर नहीं, बल्कि डरपोक तरीके से गुप-चुपकर। वे आपके साथ अपनी काम वासना को पूरा करने के लिए जुड़े रहे। आप पूछ सकती थीं, 'आपके नैतिक उसूल अब कहां गए, जिस समय आप मेरे साथ हैं? आप उनको अपने काम के बारे में विस्तार से उपदेश दे सकती थीं और इस तरह अपने काम का आसानी से प्रचार कर सकती थीं। आप कह सकती थीं कि क्या सेक्स हर किसी की जरूरत नहीं है? मैं खुश हूं कि आपने यह तरीका नहीं चुना। वह तब भी ऐसा ही पाखंडी बर्ताव करते। आप उन्हें कितना भी ज्ञान क्यों न दे देतीं, वह फिर भी उसी तरह का व्यवहार करते। वह अरबी में एक कहावत है न कि बकरी अगर उड़ने भी लगे, तब भी बकरी ही रहेगी।

वह ज्यादा स्‍मार्ट नहीं थे, क्योंकि वह आमिर खान से आगे किसी का नाम ले पाए। ऐसे में आपको एंड्रिए ड्वॉरकिन, कैथरीन मैक्निोन जैसे नाम लेने चाहिए थे। आपको उनसे पूछना चाहिए था कि अगर हम महिलाएं 'मेरा शरीर, मेरी मर्जी' में यकीन करते हैं तो फिर पॉर्नोग्रफ़ी रेग्युलेटरी लिमिट के भीतर रहकर क्यों नहीं हो सकती है?

असल में उन्होंने आप पर कोई पत्थर फेंककर वार नहीं किया था। असलियत यह है कि उन्होंने आपके प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए सर्वसम्मति से ट्रिपल एक्स वेबसाइटों पर से प्रतिबंध हटा दिया था। यह अजीब है कि एक ओर जहां लिंग और योनि हमारे पारंपरिक महाकाव्यों और कला-संस्कृति में जगह पा जाते हैं, वहीं पॉर्न को लेकर लोगों में बैठा फोबिया हमारे मौजूदा समाज के सामाजिक मूल्यों को तोड़-फोड़ रहा है।
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