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'नापाक' इरादों वाले अफसर को 'सबक' सिखाने वाली 26 साल की रेहाना जब्बारी का आखिरी ख़त

1 अप्रैल 2014. वो तारीख जब 26 स‌ाल की रेहना जब्बारी ईरान की जेल में अपनी मां के नाम एक ख़त लिख रही थी। 25 अक्टूबर 2014 को रेहाना जब्बारी फांसी पर लटका  दी गई।रेहाना का कसूर यह था कि उसने 19 साल की उम्र में उस शख्स को चाकू घोंपकर मार दिया था, जिसने उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की थी। 2007 में रेप की कोशिश करने वाले पूर्व खुफिया एजेंट मुर्तजा अब्दोआली सरबंदी पर रेहना ने स‌ेल्फ डिफेंस में चाकू से वार किया था, जिससे उसकी मौत हो गई। इसकी स‌जा के तौर पर रेहाना को फांसी दे दी गई। फांसी स‌े पहले रेहाना ने अपनी मां सालेहा के नाम एक चिट्ठी लिखी था, जिसे उसकी फांसी के अगले दिन 26 अक्टूबर को सार्वजनिक किया गया। इस चिट्ठी में रेहाना ने अपनी मौत के बाद अंगदान की ख्वाहिश जाहिर की थी। रेहाना की मां चाहती थीं कि बेटी की जगह उन्हें फांसी पर लटका दिया जाए। पढ़िए मां के नाम रेहाना की वो चिट्ठी-

मेरी प्यारी अम्मी,
आज मुझे पता लगा कि किस्मत मुझे सजा के करीब ले आई है। मुझे इस बात का अफसोस है कि आप अपने दिल को नहीं समझा पा रही हैं कि मैं अपनी जिंदगी की किताब के आखिरी पन्ने पर पहुंच चुकी हूं। आपको नहीं लगता कि मैं आपको निश्चिंत देखना चाहती हूं! आप जानती हैं कि मैं आज इस बात से कितनी परेशान हूं कि आप लोग मेरी वजह से दु:खी हैं। आपकी उदासी मुझे कितना शर्मिंदा करती है? क्यों आप ने मुझे यह अवसर नहीं दिया कि मैं आपके और अब्बा के हाथ को अंतिम बार चूम सकूं?

अम्मी, इस दुनिया ने मुझे 19 साल की जिंदगी दी। मेरे लिए उस मनहूस रात को मरना तय था। मेरी लाश शहर के किसी अंधेरे कोने पर फेंक दी जाती और कुछ दिन बाद पुलिस आप को उसकी पहचान के लिए बुलाती। आपके लिए वह लम्हा कितना तकलीफदेह होता, जब आप को ये पता चलता कि मेरे साथ बलात्कार किया गया। निश्चित तौर पर क़ातिल का कोई पता नहीं चलता क्योंकि हमारे पास न उसके जैसी दौलत है और न राजनीतिक ताकत। उसके बाद आप सारी जिंदगी घुट-घुट कर, पीड़ा और शर्मिंदगी में गुजारती। फिर इस अफसोस में मर भी जातीं। लेकिन इस अभिशाप पूर्ण घटना ने सारी कहानी बदल दी। मेरा शरीर शहर के किसी कोने पर नहीं फेंका गया, बल्कि इस इविन जेल में कैद कर दिया गया। इस जेल जैसी तन्हा कब्र में रहने के बावजूद मुझे किस्मत से कोई शिकायत नहीं है। इसे ही मेरी किस्मत समझें और कोई शिकायत न करें। क्योंकि आप अच्छी तरह से जानती हैं कि मौत जीवन का अंत नहीं।

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अम्मी, आपने ही मुझे सिखाया था कि हर इंसान इस दुनिया में एक अनुभव हासिल करने और सबक सीखने के लिए आता है। हर जीवन एक नई जिम्मेदारी लाता है। इन सभी बातों से मैंने यह सीखा कि जीवन संघर्ष है। कई बार हमें लड़ना भी पड़ता है। मुझे याद है कि आपने मुझे बताया था कि उस रात मुझे ले जाते समय बघ्घी वाले ने मुझ पर कोड़े मारने वाले का विरोध किया था, लेकिन उस कोड़े बरसाने वाले ने उस बघ्घी वाले के चेहरे और सिर पर ऐसी चोट की कि उसकी मौत हो गई। आप ने मुझे बताया था कि इंसान को अपने उसूलों की रक्षा के लिए अगर जान देनी पड़े तो परहेज नहीं करनी चाहए। शायद उसने भी यही किया।

मेरी अम्मी, जब हम स्कूल जाते थे तो आप हमें सिखाती थीं कि झगड़े और शिकायत के समय भी हमें एक भद्र महिला की तरह बर्ताव करना चाहिए। आपने विनम्रता की शिक्षा दी थी। आपको याद है कि आप इन बातों पर कितना जोर देतीं थीं? लेकिन लगता है कि आज के वक्त में आपकी शिक्षा बेकार साबित हो गई। जब वो मनहूस घटना हुई तो आपकी यह शिक्षा मेरे काम नहीं आई। कोर्ट में मेरी पेशी एक क्रूर हत्यारिन और एक आदतन अपराधी के तौर पर हुई। लेकिन मैंने आंसू नहीं बहाए। मैंने दया की भीख नहीं मांगी। मैं रोई नहीं। मैंने सिर नहीं झुकाया। मुझे कानून पर विश्वास था लेकिन फिर भी मुझ पर कानून के उल्लंघन का आरोप लगा।

अम्मी आप जानती हैं कि मैंने जिंदगी में एक मच्छर भी नहीं मारा। मैं कॉकरोच को मारती नहीं थी। उनके सिर को मूँछों से पकड़कर बाहर फेंक आती थी। लेकिन आज मुझे एक कातिल की तरह पेश किया जाता है। मैं हैरान हूं कि मेरे जिंदगी से प्यार के इस रूप की एक नई परिभाषा पेश की गई। मुझमें क्रूरता ढूंढी गई। मुझे हैरत है कि उस घटना के समय मेरे नाखूनों पर लगे पॉलिश को भी जज ने देखना नहीं चाहा और मेरी स्त्रीत्व की सारी पहचान अनदेखी कर दी गई।

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वह लोग कितने आशावादी होते हैं जो अदालतों से इंस‌ाफ की उम्मीद करते हैं! इंसाफ करने वालों ने यह कभी नहीं देखना चाहा कि मेरे हाथ किसी खिलाड़ी की तरह सख्त नहीं हैं। ख़ासतौर पर मुक्केबाज़ लड़कियों के हाथों की तरह। आपने मुझे इस वतन से प्यार करना सिखाया। लेकिन ये वतन अब मुझे नहीं चाहता। उस पल जब कोर्ट में वकील मुझसे जिरह कर रहे थे, तब कोई मेरी मदद के लिए आगे नहीं आया। मैं केवल लोगों के ताने सुनती रही। जब मैंने अपनी खूबसूरती और स्त्री पहचान की अंतिम निशानी, अपने लम्बे घने बालों से छुटकारा पा लिया, तो इसके बदले मुझे 11 दिन तन्हा काल कोठरी में गुजारने पड़े।

मेरी प्यारी अम्मी, आप मेरी इस बात को पढ़कर रोयें नहीं और अपने आंसुओं को बर्बाद न करें। आपको याद है न कि पहले दिन पुलिस स्टेशन में एक अविवाहित पुलिस एजेंट ने मेरे नाखूनों पर टिप्पणी कर मुझे दुख पहुंचाया था। उस दिन मुझे लगा था कि इस दौर में सुंदरता या किसी क्षमता की कोई अहमियत नहीं। चेहरे की सुंदरता, विचारों और सपनों की सुंदरता, सुंदर लिखावट, देखने के नज़रिये की सुंदरता और यहां तक कि किसी प्यारी आवाज़ की सुंदरता भी किसी को नहीं चाहिए। आज इन चीजों की कोई कद्र नहीं।

मेरी प्यारी अम्मी, मेरे विचार बदल चुके हैं। इसके लिए आप बिल्कुल भी जि़म्मेदार नहीं है। मेरी बात कभी ख़त्म नहीं होने वाली, लेकिन मुझे अपनी बात खत्म करनी होगी। ताकि मैं यह ख़त किसी को दे सकूं, जो इसे आप तक पहुंचा सके। जब आपकी गैरमौजूदगी और जानकारी के बिना मुझे मृत्युदंड दे दिया जाए, तो उसके बाद इसे आपको दे दिया जाए। मैंने आपके पास अपने हाथों से लिखी वसीयत धरोहर के रूप में छोड़ी है।

मैं आपसे इस अंतिम क्षण में कुछ मांगना चाहती हूं, जिसे आपको मेरे लिए पूरी ताकत से हासिल करना है। सच तो यह है कि यह एक चीज है, जिसें मैं सारी दुनिया और इस प्यारे वतन से और आपसे मांगना चाहती। मुझे मालूम है कि इसके लिए आपको समय की जरूरत होगी। मैं चाहती हूं कि आप कोर्ट जाएं और मेरी यह मांग उनके समक्ष पेश करें। मैं यह आवेदन यहां जेल से नहीं भेज सकती, इसलिए आप उनसे आग्रह करें और मेरी यह याचिका प्रस्तुत करें। अम्मी, आप जानती हैं कि मैंने हमेशा आपको मेरे जीवन की भीख मांगने से रोका है। लेकिन यह एक ऐसी इच्छा है, जिसके लिए अगर आपको भीख मांगनी पड़े तो भी मुझे बुरा नहीं लगेगा।

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मेरे प्यारी अम्मी आप मुझे मेरी जिंदगी से ज्यादा प्रिय हैं। लेकिन फिर भी मैं आपको यह कष्ट दे रही हूं क्योंकि मैं जमीन के अंदर सड़ना नहीं चाहती। मैं यह नहीं चाहती कि मेरी दो आंखे, जिन्हें अभी बहुत कुछ देखना था और मेरा यह नौजवान दिल मिट्टी में दफन हो जाए। लिहाज़ा मैं आप से भीख मांगती हूं कि मुझे फांसी पर लटकाए जाने के तुरंत बाद हर वह संभव कोशिश की जाए कि मेरी आंखे, मेरा दिल, मेरी किडनी, बाकी जिस भी अंग का प्रतिरोपण हो सके उन्हें मेरे शरीर से निकाल दिया जाए और उन्हें तोहफे के तौर पर दिया जा सके, जिनको इनकी जरूरत है। मैं यह भी नहीं चाहती कि जिन्हें मेरे अंग मिलें उन लोगों को मेरे नाम का पता चले। या फिर वे इसके बदले मेरे लिए फूल खऱीदें या मेरे लिए दुआ करें।

मैं तहे दिल से आपसे कहना चाहती हूं कि मुझे अपने लिए वह कब्र भी नहीं चाहिए, जहां आकर आप मुझे याद करें। मातम मनाए और उदास हों। मैं सच्चे दिल से चाहती हूं कि आप मेरे इन मुश्किल दिनों को भूल जाने की कोशिश करें। मुझे इन हवाओं में विलीन होने दें।

दुनिया मुझे प्यार नहीं करती। न ही इसे मेेरी जरूरत है। इसलिए मुझे मौत को गले लगाने दें। ताकी मैं ख़ुदा की अदालत के दिन हर उस व्यक्ति से हिसाब ले सकूं जो आज मेरा हिसाब ले रहा है। भगवान की अदालत में मैं डॉक्टर फरवंदी, कासिम शबानी, इंस्पेक्टर शामिल से हिसाब लूंगी। खु़दा की अदालत में मैं उन सब पर मुक़दमा चलवाऊंगी, जिन्होंने जिंदा रहते हुए मुझे मारा और मेरा उत्पीड़न करने से परहेज नहीं किया। दुनिया बनाने वाले की अदालत में उन सब का हिसाब लूंगी, जिन्होंने अनजाने में या जानबूझकर मेरे साथ ग़लत किया। मेरे अधिकारों को कुचला। इस बात का ध्यान नहीं दिया कि कई बार जो चीज़ सही दिखाई पड़ती है वो वास्तव में सही होती नहीं।

मेरी नेकदिल अम्मी, दूसरी दुनिया में उस दिन हम और आप सवाल करेंगे और ये सब लोग जवाब देंगे। देखते हैं ख़ुदा क्या चाहते है! मैं मरने से पहले तब तक आपको गले लगाना चाहती हूं, जब तक मेरी जान न निकल जाए। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं।

रेहाना
01, अप्रैल, 2014
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