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कबूतर जा, जा, जा, कबूतर जा जा जा

कबूतर जा, जा, जा कबूतर जा जा जा
पहले प्यार की पहली चिट्ठी साजन को दे आ
कबूतर जा, जा, जा   ...

उनसे कहना, जब से गये तुम, मैं तो अधूरी लगती हूँ
इन होंठों पे चुप सी लगी न रोती न हंसती हूं
भूल हुई जो उन्हें सताया, कैसा पाप किया
कबूतर जा, जा, जा   ...

मन ही मन में उनको अपना सब कुछ मान चुकी हूं मैं
वो क्या हैं, मैं कौन हूं उनकी, अब ये जान चुकी हूं मैं
उनको अपने साथ  ही लाना, दिल ही नहीं लगता
कबूतर जा, जा, जा   ...

यहां का मौसम बड़ा हसीं है, फिर भी प्यार उदास है
उनसे कहना, दूर सही मैं दिल तो उन्हीं के पास है
तू ये संदेशा उनकोओ सुनाना, मैं पीछे आया
कबूतर जा, जा, जा   ...

जहां भी देखूं तुम ही तुम हो, और नज़र न कुछ आये
दिल ये चाहे इस आलम में काश ज़माना रुक जाये
आज से पहले कभी नहीं थी इतनी हसीं दुनिया
कबूतर जा, जा, जा   ...

गीतकार- असद भोपाली
स‌ंगीतकार- राम लक्ष्मण
गायक- एस‌पी बालासुब्रमण्यम-लता मंगेशकर
फिल्म- मैंने प्यार किया (1989)
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