Top Letters
recent

वो खत के पुर्ज़े उड़ा रहा था

वो खत के पुर्ज़े उड़ा रहा था
हवाओं का रुख़ दिखा रहा था

कुछ और भी हो गया नुमाया
मैं अपना लिखा मिटा रहा था

उसी का ईमां बदल गया है
कभी जो मेरा खुदा रहा था

वो एक दिन एक अजनबी को
मेरी कहानी सुना रहा था

वो उम्र कम कर रहा था मेरी
मैं साल अपने बढ़ा रहा था

गीतकार : गुलज़ार
स‌ंगीतकार, गायक : जगजीत सिंह
एलबम- मरासिम

My Letter

My Letter

Powered by Blogger.