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तुम्हारे जहन के सबसे खूबसूरत हिस्से में मैं यूं ही धड़कता रहूंगा

-आशुतोष तिवारी

सुनो प्रिय,

तुम्हारा ख्याल मेरे ख्यालों की चौखट का सबसे कीमती पर्दा है। वक्त की नाजुक बुनावट से बना एक ऐसा झीना पर्दा जिससे मेरा हर ख्याल होकर गुजरता है। मेरे राजीव चौक से जीवन में तुम इंद्रप्रस्थ बन कर आई हो। समय के समंदर में एक ज्वार आया था। मन की रेत पर एक आकृति उभरी थी। यकीन मानो प्रिय!!! उसकी बनावट के स्केच तुमसे मैच होते हैं।  तुम्हारा एहसास मेरे वजूद का परफ्यूम बन गया है। मैं हर पल महकने लगा हूँ। नज़र के सामने आये हर इंसान को रोक कर प्यार करने का मन होता है। सोचता हूँ,  सबके लबों पर एक मुस्कान चिपकाता हुआ उसके कान में बोलूं ..."तुम इस दुनिया की सबसे खूबसूरत रचना हो।"

हमारे समय का इश्क शब्दों की त्रासदी से होकर गुजर रहा है। सोशल मीडिया की इमोजीयों ने शायरियों को बेदखल कर दिया है। हम मोहब्बत को जी कम रहे हैं, बक ज्यादा रहे हैं। लोग इश्क में 'शायर होने की बजाय 'शहर हो रहे हैं। मोहब्बत सिर्फ आई लव यू बोल देना भर नहीं है। वेलेंटाइन होना नहीं है। साथ रहना भी नहीं है। मोहब्बत वक्त के साथ चलते हुए 'मैं और 'तुम का 'हमहो जाना है। शून्य में भटकती दो बेताब रूहों का मिल जाना है। कुछ भी बोलने का इंतज़ार मत करना। बस एहसास करना। इश्क एक साधना है प्रिय!! जिस दिन बेजानियत भी प्यारी लगने लगे समझो तुमने मोहब्बत में एक मुकाम हासिल कर लिया है।

मेरा अपना 'आपतुम्हारे 'तुमजैसा है इसीलिए मैने अपना 'आपतुम्हे सौंप दिया है। तुम अपना 'तुममुझसे भी सलामत रखना। अगर हमारा वजूद कोई कविता होता तो'मेरापन उस कविता का सबसे कीमती लब्ज होता। इश्क-ए-इकरार को या आधार कार्ड के नाम पर सरकार को इसे यूं ही नहीं दे देना चाहिए।

सुनो प्रिय!! मैं एक सफर पर निकला था। वो सफर अब खत्म होने वाला है।  मैं किसी शाम की तरह ढल रहा हूँ। शहर की शामें अजनबी होती हैं। क्या पता,  वो शामें किसी रोज मुझे भी अजनबी बना दें। सूरज का अकेला यूं ही अस्त हो जाना मुझे रुला जाता है। किसी रोज उसके साथ मुझे भी अस्त होना होगा। तुम परेशान मत होना प्रिय। तुम्हारे जहन के सबसे खूबसूरत हिस्से में मैं यूं ही धड़कता रहूँगा।

तुम्हारा "तुम"
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