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प्यारे दोस्त के नाम एक चिट्ठी, सुना है आजकल तुम दुनिया का सबसे मुश्किल काम कर रहे हो?

- आशुतोष तिवारी

प्यारे दोस्त,
तुम्हे यह ख़त लिखते हुए बड़ा मज़ा आ  रहा है। कोई भी इमोजी इस मज़े को बया नहीं कर सकती। इसलिए उन्हें चेपने की बजाय 'लिखलोली' को प्रिफर कर रहा  हूँ। मुझे भरोसा है कि 'लिखलोली' का मतलब तुम जैसा 'बकलोल' जरूर समझता होगा। जो नहीं जानते उन्हें बता दू कि 'लिखलोली', बकलोली के पेट से निकला है, जिसकी पैदाइश का श्रेय कई लोग मुझे देते हैं। खैर विषय से भटकाते हुए बीच में ही यह बता दूँ कि यह ख़त लल्लनटॉप की तरह लोँडेपन से भरपूर होगा। पढ़कर खींसे मत निपोर देना। वैसे तुम्हारे दिमाग पर मुझे थोड़ा भरोसा है। मेरे हजारों घटिया जोक सुनकर भी तुम्हें आज तक दिमागी पेचिस जैसी कोई शिकायत नहीं हुई।

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दोस्त ! जब मगध एक्सप्रेस पहली बार तुम्हे बिहार से यहाँ ले आई ; तुम बिलकुल बिहार जितने प्यारे थे। पांव जमीन पर थे और आँखे आसमान पर। फोन पर स्टाइल से 'हेलो!!!' कहते थे लेकिन बोतल के ढक्कन को 'ठेपी'। जब तुमने पहली बार मेरे सामने बच्चे को 'बुतरू' कहा, यकीन मानो! मुझे इस ख़त को लिखने से ज्यादा मज़ा तब आया था। मेरे साथ बैठकर सात-आठ बार बैटमैन झेलने की पीड़ा मैं समझ सकता हूँ। जो बच्चा 'कृषि-दर्शन' देखकर बड़ा हुआ उसे एकाएक 'बैटमैन' दिखा देना मानसिक अत्याचार नहीं तो क्या है?

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हमारी-तुम्हारी दोस्ती भी बिलकुल 'ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा' जैसी थी। अच्छे और बुरे की सीमा से बेखबर एकदम बिंदास और विचित्र। पढ़ाई मैं नहीं करता था और फेल तुम हो जाते थे। सिगरेट मैं  पीता था, धुंआ तुम्हारी नाक से निकलता था। पेट मेरा खराब होता था और घंटो लूजमोशन तुम्हे होते थे। और तो और, पोर्न मैं देखता था और हालत तुम्हारी खराब होती थी। दोस्ती की हद तो तब हो जाती थी जब फोन तुम्हारी गर्लफ्रेंड का आता था और लपक मैं लिया करता था। मैं बात किया करता था और तुम श्रद्धा भरी निगाहों से मुझे देखा करते थे। इसे पढ़कर ज्यादा हंसो मत। बकैती का अधिकार सिर्फ हमारे देश के टीवी एंकरों के पास नहीं है।

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सुना है दोस्त आजकल तुम दुनिया का सबसे मुश्किल काम कर रहे हो। इश्क पर कविता लिख रहे हो। अच्छा है लिखो पर सावधानी से, अगर तुम्हारी आराध्या तुम्हारी खुद की प्रेमिका है। तुम्हारी बातें उसे लेकर प्रेमियों जैसी कम भाइओं जैसी ज्यादा रही हैं। इस भावनात्मक घोटाले का असर लेखन पर नहीं होना चाहिए। तुम मुस्कुराते हुए कहते थे कि मैं तुम्हारे ब्लॉग पर एक ब्लॉग लिखूंगा। मैंने तुम्हारी उस मुस्कान से इजाजत लेकर एक ब्लॉग लिख दिया है। मुझे पता है किसी रोज मेरी तमाम बकैतियों का गुस्सा तुम लिखकर निकालोगे। ये सब लिखकर तुम्हारी लिखलोली झेलने कि जमीन तैयार कर रहा हूँ। समय मिले तो तुम्हारे उन दोस्तों को (जो मेरे दोस्त बनने की प्रक्रिया में है) यह ख़त जरूर पढ़वाना। इसके दो फायदे हैं। मुझे एक मुफ्त का 'जी-मेल' मिलेगा और तुम्हारी धांसू ब्रांडिंग होगी। (मुफ्त का जी मेल मैं और मेरा दोस्त उन लोगों के लिए इस्तेमाल करते है, जो अपरिचित लोग हमारे ब्लॉग के फॉलोवर बन जाते हैं)

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दोस्त !! फाइनली तुम एक अच्छे इंसान हो। रिश्ते निभाने के मामले में बिलकुल पुरानी फिल्मों के किरदारों जैसे। 'दोस्त पर आंच आ गई तो आंख निकाल लूंगा' टाइप। तुम्हारे साथ से पहले मैं बहुत सिमटा हुआ लौंडा था। सामूहिक बकलोली का आनंद तुम्हारे साथ ने सिखाया है। दोस्ती पर टिकी हुई तमाम फिल्में देख पाने के बावजूद नहीं पता था कि वो क्या होती है? तुम्हारे साथ रहकर इस शब्द का अहसास किया है। उम्मीद है तुमने भी किया होगा। तमाम गलतियों को माफ़ कर देना। यूं ही मासूम रहना और उसी स्टाइल से फोन पर 'हेलो!!!!' बोलते रहना।

तुम्हारा दोस्त
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