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IAS, IPS और PCS बनकर तथाकथित 'देशसेवा' को आतुर सवर्ण भाइयों के नाम एक चिट्ठी

IAS अशोक सिंघवी को उदयपुर ACB ने 3.80 करोड़ की रिश्वत
लेने के के आरोप में गिरफ्तार किया था। 
-मयंक सक्सेना

प्यारे सवर्ण भाइयों/बहनों/साथियों, 
आप आरक्षण से परेशान हैं...क्योंकि आप देशसेवा करना चाहते थे और आईएएस या पीसीएस नहीं बन सके। अरे, तो निराश होने की क्या बात है? देशसेवा करने के लिए सिविल सेवा में जाना बिल्कुल ज़रूरी नहीं है। हां, क्यों यकीन नहीं होता क्या? अरे, पहली बात तो ये कि जिस फौज की आप दिन भर प्रशंसा करते हैं, वहां लोगों की बहुत कमी है। तो आप सबसे पहले तो अपनी प्यारी फौज में क्यों नहीं जाते? तैयारी भी आसान है सिविल सेवा से और फिर आपने ही तो कहा है कि फौजियों से बड़ी देशसेवा कोई नहीं करता।

भोपाल के सस्पेंड IAS दंपति अरविंद और टीनू जोशी याद हैं? इनके पास 300 करोड़
की अवैध संपत्ति मिली थी। टीनू भोपाल जेल में है और इसका पति अरविंद फरार है।
इसके अलावा आप विदर्भ, मराठवाड़ा, बुंदेलखंड, तेलंगाना वगैरह में जाकर किसानों के बीच काम कर सकते हैं...सेवा ही करनी है न? वैसे आप मैला ढोना भी शुरू कर सकते हैं, देश के कई इलाकों में ये अभी भी हो ही रहा है...। आप चाहें, तो जूता गांठना सीखिए, खाल उतारना, चमड़ा बनाना ...ये भी रोज़गार है...और देशसेवा भी है...
खेती कीजिए...किसान के बारे में सुना होगा, जय जवान के बाद जो आता है वही...। और हां, आप चाहें तो जंगल से जड़ी बूटियां बीन कर, हाट में बेच सकते हैं...ये भी देशसेवा ही तो है...आंदोलन का हिस्सा बनिए...लाठियां खाइए...देश के लिए डरिए मत...।

क्या कहा, ये वाली देशसेवा नहीं करनी है? ओह...अच्छा...वो नीली बत्ती की गाड़ी वाली, एसी कमरों में बैठ कर, शाम को स्कॉच सुड़कते हुए...घूस लेकर...साइन कर के...बंदूकों के लाइसेंस अप्रूव कर के...नेता जी से सांठ-गांठ कर के...भोकाल वाली देशसेवा करनी है...जिसमें रिटायरमेंट के बाद चुनाव लड़ने या कारपोरेट के साथ नौकरी की गुंजाइश रहे...वो वाली देशसेवा...।

आंध्र प्रदेश के IAS अधिकारी ए. मोहन के ठिकानों से ACB ने
800 करोड़ रुपये की संपत्ति बरामद की थी।
लेकिन वो ही क्यों? अच्छा...ये सारी देशसेवा आप ही को करनी है, क्योंकि आप सवर्ण हैं...और पिताजी को दहेज भी चाहिए...। अच्छा...एक काम कीजिए...मेरे जूते लीजिए...और अपने सिर पर मारिये...अपने घर वालों के सिर पर भी मारिए....और तब भी मनोरोग ठीक न हो...तो आइए किसी गांव में 6 महीने दलित बस्ती में रह कर आते हैं...वो शर्तिया इलाज है...।
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