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मैं अपनी कोई भी तस्वीर हंसते हुए नहीं खिंचवाती थी !

- पल्लवी त्रिवेदी

आज मुझे अपना बचपन का रंग-रूप याद आ रहा है ! बचपन में बहुत ज्यादा दुबली-पतली थी। कद भी छोटा था और एकदम सांवली ! इन सबके अलावा मेरे दांत चेहरे के हिसाब से बहुत बड़े और थोड़ा बाहर की ओर निकले हुए थे ! आगे के दो दांतों के बीच अच्छी खासी जगह भी थी ! कुल मिलाकर सुन्दर लड़कियों की श्रेणी से एकदम बाहर थी मैं ! लेकिन मुझे इन सबसे कोई फर्क नहीं पड़ता था, जब तक कि एक स्कूल की लड़कियों ने मेरे दांतों को लेकर मेरा मज़ाक उड़ाना शुरू नहीं किया ! वे मेरे दांतों पर हंसा करतीं ! मुझे "फावड़े जैसे दांतों वाली" कहतीं ! लड़ाई झगड़े के समय मुझे रुलाने का एकमात्र यही हथियार था उनके पास ! मैं तब से खुद को असुंदर महसूस करने लगी !

मैं इतनी हीनभावना से ग्रस्त थी कि बहुत बाद तक मैं अपना कोई भी फोटो हँसते हुए नहीं खिंचवाती थी ! कॉलेज तक के सारे फोटो में होंठ कसकर बंद कर लेती थी कि दांत न दिख जाएँ ! यहाँ तक कि एक बार घर आकर मैंने पत्थर से अपने दांतों को ठोककर उन्हें अन्दर करने की भी कोशिश की !

मेरे दांतों की सबसे पहले किसी ने तारीफ़ की थी तो वो एक डेंटिस्ट थे जिनके पास मैं दांतों को अन्दर करने की गुजारिश लेकर गयी थी ! उन्होंने दांत चेक किये और कहा "कितने स्वस्थ, चमकीले और सुन्दर दांत हैं, क्यों इन्हें डिस्टर्ब करना चाहती हो?" मेरे दांत...सुन्दर? मैं रात भर सोचती रही ! पहली बार मैंने अपने दो दांतों के अलावा अपने दांतों की पूरी पंक्ति ध्यान से देखी और मुग्ध भी हुई !

सिर्फ मैं नहीं, मेरी क्लास की सभी काली, ठिगनी, मंदबुद्धि, मोटी या गरीब लड़कियों को किसी न किसी तथाकथित कमतरी को लेकर मजाक का पात्र बनना पड़ा ! आज सोचती हूँ हम सब कितने कुंठित थे ! उस बात के लिए, जिस पर हमारा कोई बस नहीं था ! न केवल रंग रूप, बल्कि जाति और धर्म को लेकर भी लड़कियों को खिल्ली सहन करनी पड़ती थी !

फिर जैसे-जैसे बड़ी होती गयी, समझ आती गयी कि बाहरी रंग-रूप असली खूबसूरती नहीं है ! मेरे रफ बाल, औसत कद, छोटी आँखें, सीधी आइब्रो, चेहरे पर मुंहासों और हल्की झाइयों के निशान अब मेरे लिए खूबसूरती का पैमाना नहीं हैं ! अब मेरे सारे फोटो पूरी खिलखिलाहट के साथ ही होते हैं !

लेकिन आज भी क्या अनपढ़ और क्या पढे-लिखे, सभी लोग बच्चों का, बड़ों का उनके रंगरूप, जाति, धर्म, विकलांगता, हकलाहट, तुतलाहट, आदि बातों को लेकर मजाक उड़ाते हैं और अपने जीवन में घटिया आनंद पैदा करते हैं ! सभी लोग इस हीनभावना से नहीं निकल पाते और जिंदगी भर एक शिकायत और समाज के प्रति एक नफरत के भाव के साथ जीते हैं ! कृपया किसी का मजाक उड़ाकर अपनी विकृत व घटिया मानसिकता का परिचय न दें ! स्वस्थ हास्य को बढ़ावा दें , विकृत हास्य को हतोत्साहित करें ! 
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