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दस बच्चे पैदा करने की सलाह देने वाले शंकराचार्य नरेंद्रानंद के नाम एक हिंदुस्तानी मां की चिट्ठी

हमेशा से बदलती आ रही दुनिया में जीने का एक उसूल है कि वक़्त के मुताबिक हर चीज़ खुद को बदले। जो वक़्त के साथ खुद को बदलता नहीं है उसका खात्मा जल्द ही हो जाता है। बाकी सब चीज़ों की तरह ही धर्म पर भी यह कायदा लागू होता है। कोई भी धर्म बढ़ नहीं सकता जब तक वह अपनी मानसिकता और सोच को वक़्त के साथ न बदले। आज हिन्दू धर्म के साधु लोगों को मीडिया में बच्चे पैदा करने के बयानों और सलाहों को लेकर काफी चर्चा में हैं।

ऐसे लोगों को किसी अखबार या टीवी चैनल पर जगह मिलने से जहाँ इन लोगों को मुफ्त की पब्लिसिटी मिलती है, वहीं दूसरी ओर लॉजिकल सोच रखने वाले लोगों को इन ठग बाबाओं की असलियत और सोच के स्तर का अंदाज़ा भी हो जाता है। ऐसे ही एक बाबा या यूँ कहें कि ढोंगी बाबा का बयान पिछले दिनों टीवी और अखबार में देखा तो मन गुस्से से भर उठा। मन में तो आया कि इस बाबा को सरेबाज़ार घसीट कर पीटा जाना चाहिए, लेकिन खैर वो तो मुमकिन नहीं है और न ही देश के कानून की नज़र में ठीक है।

खैर, चलिए वापस मुद्दे पर आते हैं। सुर्ख़ियों में आने के लिए आजकल के साधु-बाबाओं ने जो सबसे आसान तरीका खोज है वो है हिन्दू धर्म और संस्कृति के बारे में बयानबाज़ी करना। कभी बाबरी मस्जिद का मामला शुरू करके, तो कभी हिन्दू माएं कितने बच्चे पैदा करें इस बात को लेकर। खुद को ऐसा ही एक धर्मधुरंदर साधु समझने वाला ठग और ढोंगी बाबा है शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती। मेरा यह खुला खत इस बाबा और औरतों को बच्चे पैदा करने की सलाह देने वाले ऐसे ही बाकी बाबाओं के लिए है।

प्रणाम नरेंद्रानंद सरस्वती,

प्रणाम सिर्फ इसलिए क्यूंकि लोगों को बुलाने का यह तरीका पूरे भारत में इस्तेमाल किया जाता है। भूलवश भी इसे यह मत समझना कि यह प्रणाम तुम्हें एक साधु की हैसियत से देखने वाले किसी भगत ने किया है। तो मुद्दा यह है कि कुछ दिन पहले मैंने टीवी और अखबार में आपका दिया हुआ एक बयान सुना और पढ़ा। उस बयान में कहा गया था कि देश में हिन्दू संस्कृति को खतरा है, जहाँ-जहाँ भी हिन्दुओं की संख्या काम हुई है आतंकवाद फैला है, हिन्दू माएं कम से कम 10 बच्चे पैदा करें और अगर उन्हें न पाल पाएं तो मेरे पास भेज दें, मैं उन्हें पालूंगा”

इस बयान को पढ़कर मैं खुद को रोक न पाई। यह खत लिखकर आपसे कुछ सवाल पूछने से, इसलिए यहाँ नीचे दिए गए सवालों का जवाब मैं मांग रही हूँ, जो मुझे नहीं लगता कि एक बेअकल इंसान दे सकता है। मेरे इस सवालों को पढ़कर मुझे आशंका है कि बहुत से हिन्दू उठ खड़े होंगे और इन सवालों के जवाब की जगह शायद मुझे गालियां ही देंगे, लेकिन गालियां देने वाले पहले जाकर अपनी माओं से पूछ लें कि वो अपने माँ-बाप के कितने नंबर की औलाद हैं। और जहाँ तक मुझे लगता है उनका उत्तर इकलौती, दूसरी, तीसरी या चौथी ही होगा। शायद ही कोई ऐसी माँ होगी जिसने 10 बच्चों को जन्म दिया।

तो, मेरे कुछ सवाल हैं जिनका जवाब अगर तुम सोच सको तो देने की कोशिश करना, नहीं तो मैं समझ जाउंगी कि इन सवालों का जवाब देने के लायक तुम हो ही नहीं, और जैसा कि पूरी दुनिया जानती है धर्म के नाम पर भारत में व्यापार हो रहा है, यह बात सिद्ध हो ही जायेगी। मेरे सवाल कुछ इस तरह से हैं:

1. औरतें 10 बच्चे पैदा क्यों करें?
2. क्या तुम्हारी माँ ने 10 बच्चे पैदा किए?
3. 10 बच्चे पैदा करने की दिशा में तुमने कौन सा कदम उठाया?
4. लोगों को सलाह देने से पहले क्या तुमने खुद किसी बच्चे का बाप होने की जिम्मेदारी उठाई है?
5. लोगों के दिए दान की भीख पर पलने के अलावा क्या खुद कभी कोई पैसा कमाया है?
6. कभी किसी औरत से पूछा है कि एक बच्चा पैदा करने के लिए क्या कुछ सहन करना पड़ता है?
7. हिन्दू संस्कृति को बचाने के लिए ऐसा कौन सा महान काम तुम कर रहे हो जो तुम्हें ऐसी बयानबाज़ी करने का हक़ देता है?

इन सवालों का जवाब अगर तुम दे सको तो मैं तुमसे कुछ और सवाल पूछना चाहूंगी और इस हक़ से पूछना चाहूंगी क्यूंकि (1) मैं एक औरत हूँ और तुमने औरतों पर टिपण्णी की है। (2) मैं उस अभागे देश में रह रही हूँ जहाँ धर्म के नाम पर मंदिरों में लाखों के दान किये जाते हैं और बाहर बैठे गरीबों को लातें और गालियां भर ही मिलती हैं। जबकि अंदर बैठे तुम जैसे लोग बिना हाथ तक हिलाये मुफ्त की रोटियां तोड़ रहे हो।

जहाँ तक मैं तुम जैसे पाखंडी बाबाओं को समझ सकी हूँ, अपने पूछे गए कुछ सवालों के जवाब मैं खुद भी देना चाहूंगी और याद रखना यह जवाब तुम जैसे साधुओं की करतूतों को अच्छे से रिसर्च कर इतिहास से जानकारी लेकर उस आधार पर लिखे गए हैं। इन जवाबों पर या विचारों पर ऊँगली उठाने से पहले अच्छे से पढ़ाई करके आना, नहीं तो मुँह की खाओगे।

मेरे जवाब...

तुम्हारा कहना है कि हिन्दू माएं 10 बच्चे पैदा करें ताकि धर्म की रक्षा हो सके। मैं पूछती हूँ धर्म की ऐसी कौन सी दीवार है जो गिर रही है और इंसानों की फ़ौज उसे थाम कर खड़ी रह सकती है? धर्म कभी ख़त्म नहीं हो सकता और धर्म पर कभी कोई मुसीबत नहीं आ सकती क्यूंकि सभी को एक बराबर मानना ही कहलाता है धर्म, न कि भेदभाव करना सिखाता है धर्म। जैसा कि तुम चंद लोगों ने अपने फायदे के लिए धर्म को बना रखा है। लोगों को जातियों और फ़िकरों में बाँट कर। धर्म वो है जो सभी इंसानों को मिलकर भाइचारे से रहना सिखाता है, न कि उन्हें मंदिर-मस्जिद के पीछे लड़वाता है। गोहत्या का दोष लगाकर मरवाता है।

असल में वह जिसे तुम धर्म कह रहे हो न वह सिर्फ तुम्हारा स्वार्थ है, तुम्हारा धंदा है। जिसमें तुम लोगों को बाँट कर, डरा कर, नफरत पैदा कर चला रहे हो। असल धर्म इंसान के अंदर होता है, जो उसे कमीनेपन और गलत कामों से दूर रखता है और उसे समझ देता है।

जहाँ तक 10 बच्चे पैदा करने की बात है तो मुझे लगता है कि तुम्हें लावारिस फिरते, अध-पले बच्चे इसलिए चाहिए ताकि तुम उन भूखे नंगों की फ़ौज पैदा कर स को जो कि तुम्हारे इस धंधे को चलाने में तुम्हारी मदद करें। इसलिए भी ताकि हिन्दू मुस्लिमों की लड़ाइयों में वो तुम जैसे लोगों के इशारे पर नाच सकें। जैसा कि बाबरी मस्जिद या गोधरा और मुजफ्फरनगर मामलों में हुआ। या हाशिमपुरा में या फिर दादरी में अखलाक के साथ?

ताकि जिस माँ ने तुम्हे पैदा किया, (मुझे अफ़सोस है उस माँ के लिए) उसी के अधिकारों का तुम हनन कर सको। धर्म और मर्यादाओं के नाम पर ही औरतों को मर्द पीछे रखते आये हैं। औरत चलेगी तो मर्द से पीछे चलेगी। कमाएगी नहीं क्यूंकि अगर वो कमाने लगी तो वो मर्द के बराबर पहुँच जायेगी और अपने हक़ जान जायेगी। मंदिर में पूजा करेगी तो हम पुजारियों का क्या होगा। यही सब डर जो तुम जैसे लोगों के मानों को घेरे हुए हैं, इन्ही को लेकर औरत के अधिकारों का हनन होता आ रहा है। जब तक तुम जैसे ज़िंदा रहेंगे, होता रहेगा।

तुम इसलिए भी लोगों की फ़ौज चाहते होगे ताकि तुम्हारा ज़ात-पात का नारा बुलंद रहे और लोग हमेशा ही बनते रहें। तुम अपने धर्म की बीन बजाते रहो, जिससे तुम आराम से निठल्लों की तरह बैठे खाते रहो। मन किया तो ऐसा ही कोई बयान फिर से दे दिया। सरकार की नज़र में आ गये तो एक आध टिकट तो मिल ही जायेगी। फिर संसद में टेबल ठोक कर तरक्की की ओर ले जाने वाले हर बिल का रास्ता भी रोकोगे। ताकि तुम्हारी दुकानदारी चलती रहे।

इसलिए भी तुम्हें लोगों की फ़ौज चाहिए होगी ताकि भगवे झंडे का नारा देकर वो अनपढ़ भूखे नंगे तुम्हारे टुकड़ों पर पलने वाले लोग दूसरे मजहब के हर आदमी का गला उसी भगवे झंडे से घोंट दें, जो तुम देश के हर कोने में फहराना चाहते हो।

अब सवाल यह उठता है कि कोई औरत ऐसे घटिया और घिनौने कामों के लिए 10 बच्चे पैदा क्यों करे? अपनी माँ से जाकर सवाल करना कि तुम्हें 9 महीने पेट में रखने वाली माँ ने उन 9 महीनों में कितनी तकलीफों का सामना किया था और यह भी कि क्या हालत थी उसकी तुम्हें जन्म देते वक़्त? ज़ाहिर सी बात है कि वो पल वो महीने उसके लिए काफी तकलीफ भरे रहे होंगे। अपनी मां से जाकर पूछना कि क्या वो 10 बच्चे पैदा करके तुम्हें देगी, ताकि तुम हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए उन्हें पहरेदार बना सको?

कोई औरत तुम्हारे इन घटिया इरादों के लिए इतने बच्चों को जन्म क्यों देगी? अपनी ज़िन्दगी के करीब करीब 10 साल वो क्यों बर्बाद करेगी? बच्चों को जन्म देकर तुम जैसे जाहिल और नालायक इंसान के पास क्यों भेजेगी, जो धर्म की आड़ में मुफ्त की रोटियां तोड़ लोगों को मूर्ख बना रहा है? जो मेहनत करके अपना पेट तक नहीं पाल सकता, इसलिए भगवा पहन बैठा है। सच्चे साधुओं को भी बदनाम कर रहा है।

तुम जैसे साधुओं का हाल सच में तरस करने के लायक है। साधु वो होता है, जो संसार और संसार के मोह छोड़ कर अपनी ज़िन्दगी उस ऊपर वाले के हाथ सौंप देता है और तुम जैसे हैं जिन्हें भगवा पहनने के बाद भी औरतों के ही ख्याल आते रहते हैं। तुम इसी बात की गिनती करते रहते हो कि एक औरत कितने बच्चे पैदा करे।

मैं तुम्हें एक मशवरा देना चाहती हूँ नरेंद्रानंद, साइंस ने काफी तरक्की कर ली है और शायद डॉक्टर तुम्हारा लिंग परिवर्तन करने में तुम्हारी मदद कर सकें। तब तुम 10 बच्चों को जन्म देकर दुनिया के सामने आओगे तो शायद बाकी की औरतें भी हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए 10 बच्चे पैदा करने की बात सोच सकें। (source: wheelofstories)
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