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रक्षामंत्री पर्रिकर के नाम चिट्ठी, टुच्चई छोड़ें लापता विमान और 29 सैनिकों की तलाश में दिमाग लगाएं

- कृष्णकांत

आदरणीय मनोहर पर्रिकर जी 
आप केंद्र सरकार के मंत्री हैं या तालिबान के मुखिया? कोई मंत्री या मंत्रिमंडल का सदस्य गली के गुंडे की तरह भीड़तंत्र के न्याय का समर्थन कैसे कर सकता है? आप इस देश की जनता को यह भी बताएं कि फिर इस देश के संविधान का क्या? न्यायपालिका का क्या? प्रशासन का क्या? कोई सरकार से असहमत है तो उसे भीड़तंत्र की कार्रवाई द्वारा सबक सिखाया जाएगा? और दूसरी बात, अगर आप अपने से असहमत कलाकारों को इस तरह खुलेआम धमकाते फिर रहे हैं तो आमिर खान ने गलत क्या कहा था?  

मैं चाहता हूं कि आपसे कोई पूछे कि रक्षा क्षेत्र में आपने कौन सा तीर मारा है? एक लापता विमान और 29 सिपाहियों के गायब होने की शर्म क्या इस रूप में बाहर आ रही है? एक बहुमत की सरकार के मंत्री के रूप में कौन सी कुंठा है जो अपने देश के नागरिकों से ही लड़ने में आनंद प्राप्त करती है? आदरणीय रक्षामंत्री जी, लड़ना ही है तो चीन उत्तराखंड आकर सैर कर गया है. जरा उससे लड़कर दिखाएं. चीन से निपटने के लिए आपने क्या तैयारी की है? 

जरनल वीके सिंह के सेनाध्यक्ष रहते हुए हमें बताया गया था कि देश की सेना के पास लड़ने के लिए हथियार नहीं हैं. आपने कितनी तैयारी की है? अगर आज युद्ध हो जाए तो आप क्या करेंगे? जैसा भारत में होता आया है, हमारे बहादुर सैनिकों को पैदल भेजेंगे या चप्पल जूता पहनने की व्यवस्था हो गई है? 

सर, मैं यह कहना चाहता हूं कि यह देश, इसका नेतृत्व और इसके नेता कितने आत्मघाती हैं कि हम लोग आपको लगातार संवैधानिक तंत्र और लोकतंत्र की धज्जियां उड़ते हुए देख रहे हैं. हम सबका दिन-ब-दिन अनुकूलन हो रहा है. यह सहमति और अनुकूलन का खेल हमें हर दिन थोड़ा-सा तालिबान बना देता है. हम धार्मिक फतवों की निंदा करते करते अचानक राजनीतिक फतवे सुनने लगे हैं. हर दिन हम थोड़े से और तालिबान हो जाते हैं. ऐसा लगता है कि भारतीय संसद में कोई कठमुल्ला अपना मदरसा लेकर घुस गया है. 

आप कहते हैं कि "देश के ख़िलाफ़ बोलने वाले किसी भी शख़्स को 'सबक' सिखाया जाना चाहिए जैसे कि एक अभिनेता और एक ऑन लाइन ट्रेडिंग कंपनी को 'सबक' सिखाया गया था." 

आप जरा यह भी बताएं कि आपको सिर्फ सलमान खान मंजूर हैं? जो उनके साथ किया गया है, वह सारी दुनिया देख रही है. वह मोदी का चमचा बनकर सजा से मुक्त हुआ है. उसका गवाह सार्वजनिक बयान दे चुका है कि हमारी गवाही नहीं ली गई. फुटपाथ पर लोगों को कुचलने के मामले में भी यही खेल हुआ था कि गवाह को निपटाया गया. उस अन्याय को न्याय दिलाने वाली कोई संस्था इस देश में है? आप उस पर क्या कहेंगे? 

आपकी धमकी आमिर खान की आशंका को सही ठहराती है. आप चाहते हैं कि जनता की सरकार की हरकारा की तरह रहे, आप लोकतंत्र में मुर्दा नागरिकता पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं. आमिर जिसे असहिष्णुता कह रहे हैं, मैं उससे भी सहमत नहीं हूुं. मैं कहता हूं कि यह एक साठ साल पुराने विकासशील वृहद लोकतंत्र के तालिबानीकरण का प्रयास है. आप जबानों पर जितने ताले जड़ने का प्रयत्न करेंगे, दुनिया आपको उतना ही कोसेगी. एक मुर्दा और दमित लोकतंत्र आपकी पार्टी के माथे पर कलंक की तरह चस्पा हो जाएगा. उम्मीद है आप सब लोग सत्ता में बैठकर लोकतांत्रिक मर्यादाओं, जिसकी शपथ ली है उस संविधान और उदारवादी समाज का मान रखेंगे. 

आपका 
एक अदना नागरिक
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