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पीएम मोदी के नाम एक बनारसी की चिट्ठी, क्योटो छोड़िए, पुराना वाला बनारस ही बना दीजिए !

पीएम मोदी जी प्रणाम,

हमारा नाम और परिचय सिर्फ एक शब्द का है, बनारसी…बनारस तो याद है ना आपको? वही मलदहिया चौराहे वाला बनारस जहां से झुक कर आप मालवीय जी को फूल चढ़ाए थे, वही कचहरी वाला बनारस जहां से गंगा मईया हमको बुलाई हैं, ऐसा कहे थे। बड़ा बखत हो गया आपको देखे, दर्शन नहीं दिए तो सोचे एगो चिट्ठीए लिख दें आपको।

मोदी जी, वैसे तो हम आपसे मिले नहीं हैं, लेकिन देखे जरूर हैं। एक दम्मे चमकते हैं आप, मंच से खड़े आप दोनों हाथ फैला फैला के जब बोल रहे थे तो पीछे वाले चौरसिया जी का लड़का मुंह बाए सुने जा रहा था। हम भी सुने रहे, बनारस को जापान जैसा सुंदर बनाने का वादा किए थे आप। फिर अस्सी घाटा पर मार के फावड़ा पूरा मिट्टी का पहाड़ ढहा दिए थे। पुरानी बात नहीं है आपको याद होगी भी, सब बनारसी लोग पान खाकर थूकना छोड़ दिए थे। नाली के किनारे जाकर छिप्पे छिप्पे थूका करते थे। पन्नी, कागज, दोना, पत्तर सब के सब डब्बा में डाला जाता था। कुछ दिन साफ भी रहा था बनारस। लेकिन जैसे जैसे दिन बीतते गए बनारसी फिर अपने मिजाज में वापस आने लगे, और आप भी आना बंद कर दिए।

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बहुत गर्व होता है हमको जब हम किसी को बताते हैं कि हमारा सांसद देश का प्रधानमंत्री है। हमारा नेता दूसरे देशों में जाकर अपनी बातों को बताता है। लेकिन बनारस को देखते हैं तो डर जाते हैं, कहीं आप भी दूसरे नेताओं की तरह सिर्फ वादे तो नहीं कर रहे थे? कहीं आप भी तो वोट लेने के लिए फुसला तो नहीं रहे थे? कभी ऑस्ट्रेलिया में, कभी अमरीका में, जहां नहीं तहां आपको सुनते थे, लेकिन इधर बनारस में दिखाई नहीं दिए? कल महादेव के यहां चाय पीने गए थे, सोचा मनोहर का एक पान भी दबा लें, वहां पहुंचे तो मनोहरवा कहा कि बैठो बनारसी, लगाते हैं बीड़ा, तनिक भीड़ छंट जाए दो, और अखबार का एक पन्ना थमा दिया, कहा देखो तब तक देश दुनिया में का चल रहा है? हम भी पढ़ने लगे तो पढ़े कि मोदी जी क्योटो बनाने का वादा किए एक साल हो गया लेकिन कुच्छो नहीं हुआ।

एक साल हो गया है, हम बनारस के लोग, बनारस को जापान बनते देखने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। वैसे सच कहें तो बनारस को क्योटो नहीं, सिर्फ वही पुराना वाला बनारस ही बना दीजिए, तो भी बड़ी मेहरबानी होगी। साफ सुथरा, धूल मिट्ठी से दूर, अब तो इतना गरदा उड़ने लगा है कि आधे लोग अस्थमा के मरीज हो गए हैं। सड़कें इतनी टूटी हुई हैं कि निकलना दूभर, पांडेपुर से भोजुबीर जाने में पसीना छुट जाता है।

गंगा मइया पर इस पूर्णिमा स्नान करने गए थे, सोचे थे कि मोदी जी साफ करने का वादा किए थे, पूरी तो नहीं, थोड़ी बहुत जरूर साफ हो गई होंगी। लेकिन वहीं हाल है, न गंगा साफ होती दिखी और न ही कही कोई घाट साफ दिखा। सब वैसा ही है, जैसा एक साल पहले हुआ करता था। हमारे घर के बाहर अभी भी नाली का पानी वैसे ही जाम रहता है, गली में जानवर वैसे ही घूमते टकराते हैं। कूड़ा फेंकने की कोई व्यवस्था नहीं है। सड़कें जाम वैसे ही रहती हैं, जैसे पहले रहती थीं। हां लोग मंहगी गाड़ियां खरीद लिए हैं लेकिन जाम में हमही निकल पाते हैं, वो लोग खाली हार्न बजाते रह जाते हैं।

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हम जानते हैं कि आप बनारस के लिए बहुत बड़ा सपना देखे हैं, और आपके सपने पर ही भरोसा करके हमने आपको चुना था। लेकिन अब काफी वक्त हो गया है, आप ने हमारी तरफ देखा भी नहीं। ये भी पता है कि बहुत व्यस्त रहते हैं आप, बहुत सारा काम रहता है, लेकिन जब आप चुनाव में भाषण देने के लिए आरा और भागलपुर जा सकते हैं तो दिल्ली से बनारस की दूरी बिहार से कम ही है। बाकी विश्वास अभी भी है और इंतजार अभी है। तो मोदी जी, कभी आइए बनारस, आप ही का संसदीय क्षेत्र है, और आप ही के संसदीय क्षेत्र के लोग है हम।

हर हर महादेव
एक बनारसी
(source:desigags)
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