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जॉर्जिया से मोदी को कश्मीरी लड़की का ख़त, सोचिए बुरहान ने पेन की जगह बंदूक क्यों चुनी?

- फातिमा शाहीन

आदरणीय प्रधानमंत्री, अगर हम कश्मीरी लोगों का ख्याल रखते हैं तो उनको स्वंतत्रता से वंचित करने के लिए हम घाटी में सभी तरह की संचार व्यवस्था को बंद करके रास्ता नहीं निकाल सकते. हम लोगों को उनकी बात को सुनने के लिए सभी माध्यमों को खुला रखना होगा क्योंकि ऐसा नहीं है कि सभी कश्मीरी लोग इसके लिए पूछ रहे हैं.

मैं 10 जुलाई को अपने रिश्तेदारों से मिलने कश्मीर आई थी, लेकिन यहां की स्थिति काफी भयावह है। कभी ज़िंदगी में इस तरह का अनुभव नहीं हुआ था। प्रधानमंत्री जी, मैं खबरें देख रही हूं, फ्रांस के नीस में हुए हमले को दिखाया जा रहा है, इसके बाद तुर्की में तख्तापलट की कोशिश से जुड़ी खबरों को, साथ ही दक्षिणी भारत में मॉनसून से जुड़ी खबरों को, लेकिन कश्मीर से जुड़ी खबरें कहां हैं? इस कारण मैं कभी नहीं जान सकती थी कि मेरे गृह शहर में इतने लंबे समय तक क्या चल रहा है, सर?

हर कोई कश्‍मीर चाहता है लेकिन यहां के लोगों की परवाह किसी को नहीं है. अगर हमने कश्‍मीर के लोगों की परवाह की होती तो हम लोगों के इस विचार की परवाह नहीं करते कि बुरहान वानी आतंकी था या शहीद. हमें यह समझने की जरूरत है कि एक अच्‍छे छात्र ने पेन के बजाय बंदूक (गन) को अपने करियर के रूप में क्‍यों चुना?

जॉर्जिया से एक कश्मीरी 
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