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सुनो गोभक्तों, विश्वगुरुओं और दो पाया जानवरों, मैं तुम्हारी 'गऊ माता' बोल रही हूं

- चंद्रमोहन 

मैं जंगली, अल्हड़ और मस्त खुले मैदानों में घूमा करती थी। दिन भर का बस एक ही काम खाने का जुगाड़ लगाओ, पेल के खाओ धप से गोबर कर दो। ख़तरे थे पर प्राकृतिक, जो कि वो क्या कहते हैं; पारिस्थितिकि तंत्र को संतुलित करने का ही काम करते थे...जैसा कि होते हैं हमारे जंगल के राजा साब ही हमारे लिए ख़तरा हुआ करते थे। कभी कभी शिकारी कुत्ते वगैरा भी आ मरते थे, जिन्हें आप छुट भैये नेता से तहसीलदार तक मान सकते हैं, मैं बुरा नहीं मानूँगी ...

फिर एक अजीबोग़रीब दो पाया जानवर आया और उसने सब कुछ उलट पलट कर दिया। उसने हमारे घर के मर्दों को उनके खेतों में बंधुआ मजूर बना मारा और हमें माँ कह के सार में बाँध लिया। वो ख़ुद के घर की माँ बहनों को तो स्तन से चुन्नी ना हटाने देता है, पर मुझ गौ माता के स्तन दोह दोह के दूध निकाल अपने बच्चों को पिला देता...

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इन नास पीटो से कोई पूछे कोई इनकी बहन बेटियों के साथ ऐसा करे तो? चलो ये भी सह लेते कि घर बैठे चारा दे रहा है, पर वो ज़ालिम यहीं नहीं रुका, बल्कि माँ बोल बोल के हमारा दूध बेच, घी बेच सरकारें तक बना मारी हैं और बाबा, लाला जाने क्या क्या बने बैठे हैं...

अब हालात ये हैं कि हमारे मरद तो इनके किसी काम के रहे नहीं, तो उनकी छुट्टी तो काफ़ी पहले हो गई है। हमारे पुरुष बछड़ों को मण्डी में ले जा के छोड़ आते हैं, कहीं भी बाँध। दूध देने तक हमें भी चारा ग़रीब किसान खिला ही देता है, पर दूध ना आने पे हमें लावारिस छोड़ दिया जाता है...

असल में दूध तो ख़ैर अब भैंस का पीते हैं ये लोग, पर हमारा राजनीतिक महत्व इतना मलाईदार है कि जंगल का राजा क्या इंसानों के राजा की भी हिम्मत नहीं होती। गौ शाला के नाम पे चारे की तरह पैसा उगाह ख़ुद ही खा जाते हैं। हमारे नाम पे वोट लेते हैं और अपने ही भाइयों में जूता मार से अपनी माओं को लात घूँसों से कूटते हैं ...

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हमें माँ मानने वाला देश बीफ़ निर्यात में विश्व गुरु बन चुका है। अब तो बस यही उम्मीद है की जल्दी से जल्दी क़सम राम की खाते हैं मंदिर वहीं बनाएँगे वाले फटाफट मंदिर बना के "क़सम कृष्ण की खाते हैं गौ शाला वहीं बनाएँगे" जैसा कुछ हृदयभेदक ले के आएँ और घोंप दें...। [अगर आप भी लिखना चाहते हैं कोई ऐसी चिट्ठी, जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो हमें लिख भेजें- merekhatt@gmail.com. हमसे फेसबुकट्विटर और गूगलप्लस पर भी जुड़ें]
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