Top Letters
recent

30 हजार करोड़ रुपये की नकली करेंसी ख़त्म करने के लिए 15-20 हजार करोड़ रुपये खर्च?

- मुकेश त्यागी

कुछ लोगों के अनुसार नोटबंदी का यह कदम 30 हजार करोड़ रुपये की नकली करेंसी को ख़त्म करने के लिए उठाया गया है। ‘द हिन्दू’ और ‘हिन्दुस्तान टाईम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार NIA जैसी केन्द्रीय एजेंसियों और भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता (ISI) के अनुसार हर वर्ष 70 करोड रुपये के नकली नोट प्रचलन में आते हैं और किसी एक समय देश में कुल नकली करेंसी की मात्रा 400 करोड रुपये या 10 लाख नोटों में 250 नोट आँकी गई है।

अब इस को खत्म करने के लिये पूरी करेंसी को बदलने पर 15-20 हजार करोड रुपये खर्च करना अगर मूर्खता भी नहीं तो अविवेकी फैसला तो कहा ही जायेगा। जैसे सड़क पर चींटी मारने के लिये रोड रोलर चलाना! जहाँ तक पाकिस्तान द्वारा नए नकली नोट ना बना पाने का सवाल है तो दोनों देश एक ही कंपनी की मशीन, कागज, स्याही ही नहीं, नम्बरों का भी एक ही डिजाइन इस्तेमाल करते हैं। आगे आप स्वयं सोचें। साथ ही अपराध और आतंकवाद के सवाल पर - दुनिया भर के मादक वस्तुओं, हथियारों, आतंकवाद के कारोबारी अनपढ़-मूर्ख लोग नहीं हैं।

इसे भी पढ़ें...
500 और 1000 के नोटों की 'सर्जिकल स्ट्राइक' पर RSS विचारक गोविंदाचार्य के 'मन की बात'

यह व्यापार सालों पहले ही BitCoin जैसी Digital Cryptocurrencies इस्तेमाल करने लगा है जो इंटरनेट के जरिये तुरन्त दुनिया के किसी कोने में पहचान जाहिर किये बगैर भेजी जा सकती हैं। ये 'कारोबारी' (पूँजीवाद में ये भी कारोबार ही हैं, इनसे पूंजी इकठ्ठा होती है, जिससे अधिकांश गिरोह बाद में इज्जतदार पूंजीपति और कॉरपोरेट बन जाते हैं) सिर्फ स्थानीय छोटे लेन-देन के लिए ही सबकी तरह नोटों का इस्तेमाल करते हैं, जो कुल धंधे का नगण्य हिस्सा है तथा उसे हम सबकी तरह ही ठिकाने लगा लिया जायेगा। [अगर आप भी लिखना चाहते हैं कोई ऐसी चिट्ठी, जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो हमें लिख भेजें- merekhatt@gmail.com. हमसे फेसबुकट्विटर और गूगलप्लस पर भी जुड़ें]
My Letter

My Letter

Powered by Blogger.