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'हां NDTV देशद्रोही है क्योंकि वो बाबाओं की समोसा-चटनी खिलाकर दर्शकों का कल्याण नहीं करता'

- रवीश शुक्ला

तीन नवंबर की वो शाम थी जब एक पत्रकार साथी ने मुझे बताया कि सरकार ने हुक्म सुनाया है कि NDTV INDIA को एक दिन के लिए ब्लैक आउट दिया गया। सुनकर हैरानी के साथ दुख हुआ क्योंकि ये चैनेल मेरे लिए रोजी रोटी कमाने से ज्यादा एक संस्कृति है जिसके साथ मैं बीते कई सालों से जीता आ रहा हूं।
चैनेल में चलने वाले एक डेढ़ मिनट के फोनों को देश के लिए खतरा बता दिया गया। जबकि उसी रिपोर्टर ने वतन के रखवाले सीरिज के नाम से सबसे ज्यादा कार्यक्रम हमारे चैनेल के लिए बनाए और दिखाए। कई प्रोग्राम तो बाकायदा सरकारी वेबसाइट पर लगाए गए हैं। 
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एक वर्ग हमें देशद्रोही चैनल साबित करने पर ही जुटा है। हां हम इस मामले में जरुर देशद्रोही हैं कि निर्मल बाबा छाप समोसे के साथ चटनी खिलाकर दर्शकों का कल्याण नहीं करना चाहते हैं। हम इस मामले में भी देशद्रोही हैं कि हम दर्शकों को कील ठोंकू पत्रकारिता करके डराते नहीं हैं बल्कि कोशिश करते हैं कि तथ्यों के जरिए उन्हें समझाया जाए।

हम इस मामले में जरूर देशद्रोही हो सकते हैं कि हम लोगों को ये बताते हैं कि हमारे चैनल के लिए जितनी जरुरी हम जैसे खाए अघाए पेट वाले लोगों की खबरें हैं, उतनी ही दलित, किसान, मुसलमान, आदिवासी और दूरदराज के आखिरी आदमी से जुड़ी खबर भी महत्वपूर्ण हैं।

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दोस्तों हम ये नहीं कहते हैं कि हमसे गलतियां नहीं होती हैं। छोटी गलती के लिए पत्रकार को बड़ी माफी मांगने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। सरकारें आती हैं.. चली जाती हैं.. लेकिन सिद्धांतों की पत्रकारिता करने वालों की वक्त नजीर देता हैं और ढ़पली बजाने वाली पत्रकारिता पर इतिहास हंसता है। [अगर आप भी लिखना चाहते हैं कोई ऐसी चिट्ठी, जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो हमें लिख भेजें- merekhatt@gmail.com. हमसे फेसबुकट्विटर और गूगलप्लस पर भी जुड़ें]
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