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'एंटी रोमियो स्क्वॉयड' की कार्रवाई से दुखी एक बनारसी प्रेमिका की प्रेमी के नाम मार्मिक चिट्ठीे

डियर जी,
अब कहें त कहें का? बस इतने समझिये कि आपकी दुर्दशा देख के हमारा करेजा सूख गया है। जब से घर वापस आये हैं मन करता है कि अपने को मुक्का मार-मार के अपना परान दे दें। तभिये से सोच रहे हैं कि कौने महूरत में हम आपको मानस मंदिर में बुलाये..., अरे, जब मिलना ही था तो कौनो चना के खेत के डांड़ी पर बैठ के होरहा चबाते हुए भी दु:ख सुख बतिया लेते। अगर हम मानस मंदिर में नही गये होते तो जोगिया का पुलिस आपका चमड़िया नही न उधेड़ता।

बताइये तो, कहीं एतना अनेत होता है? अभी तो आपने *"आई लभ यू"* में का खाली *"आईये"* ही बोला था कि पुलिस आ गया, और फिर आपका *हवाईये* उड़ गया। आपको तो नहीं पता चला, पर हमने देखा कि आपका जवन मुंह हम को देख कर मोदी हुआ था उ पुलिस को देखते ही मायावती हो गया। आपको तोड़ाते देख कर इतना मोह लगा न कि का कहें, बाकी हमें लगता है कि आप जब पुलिस को देखते ही भागने लगे वहीं बेजाय हो गया। आप जब भाग रहे थे तो लगता था कि कुक्कुर के डर से बिलार भाग रही हो। बाकी जदि आप भागे नही होते तो आपका अइसा कुटान नही न हुआ होता।

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का कहें ये डार्लिंग, जब एंटी रोमियो वाला सिपाहिया आपका बोखार झार रहा था तो हमको अइसा बुझा रहा था कि लाठी आपके पीठ पर नहीं बल्कि हमारे दिल पर गिर रहा है। बूझ जाइये कि हमारे दिल का चटनी पिसा गया है। मन करता था कि सिपाहिया का मूड़ी मड़ोर के चूल्ही में झोंक दें, लेकिन का करें मजबूर थे।

का जाने ऊ मुंहफुकउना पुलिसिया कउन कॉलेज में रोमियो लोग के थूरने का कोर्स किया था कि आपको एतना सफाई से थूर रहा था।

आप तो दु:ख से बेहाल थे, बकिया हम धेयान से देखे थे कि सिपहिया का हर लाठी आपके बाएं पाकिस्तान मने चूतर पर ही गिर रहा था। हरामखोर जरूर दक्षिणपंथी होगा, तभी बामपंथ पर लाठी गिरा रहा था।

बाकि जो भी हो पर एकठो बात तो मानना ही पड़ेगा कि आप हैं कलकार आदमी। जब आप पुलिस का लाठी खा कर इधर-उधर कूद रहे थे तो लगता था जैसे मिथुन *"पिया मेंहदी लिया द मोतीझील से"* गाना पर डांस कर रहे हों। और जब पूरी तरह कुटा जाने के बाद आपने सिपहिया से गिड़गिड़ा कर कहा कि *"हे लठ्ठधारी ! हे कटि-कुटक! हे कुविचारी! लो सहस्त्र मुद्राएं लो और निज गृह जा आनंद करो!"*

तो आपकी कविता सक्ति देख कर मन किया कि आपको तुरंतै जोर से *आई लभ यू* कह दें। बाकि का करते, तब तो आपका *"लभ"* कहीं औरे निकल गया था, *"आई"* कहीं और ताक रहा था, और *"यू"* तो कब्बै का यू टरन मार गया था।
       
ओही बेरा से जोगिया को सराप रहे हैं कि हे राम जी! इस जोगिया का अगिले जनम में भी इसका बियाह न हो।

पूरे उ पी  के प्रेमियों का लभ ब्रेक कै देने वाले इस लभ-तोड़ मुख्यमंत्री का कब्भो भला न हो।

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अच्छा छोड़िये ई कूल। जहां जहां ढेर दुखा रहा है नि उहां ठीक से हरदी-चुना छाप लीजियेगा। आ कमर में तनी कडु तेल में लहसुन पका के मलवा लीजियेगा। और ज्यादा चिंता मत करियेगा

'गाय कौन जे खाये ना? बाभन कौन जे नहाये ना? भौजाई कौन जे गरियाये ना? नेता कौन जे चोराये ना? और प्रेमी कवन जे कुटाये ना।'

और एक चीज का भरोसा रखियेगा कि भले पुलिस मार के आपका नटई-पीठ तोड़ दे, बाकिर हमरा परेम नही टूटेगा। हम अभियो आपही से परेम करते हैं।

ढेर का लिखें, अगिला बेर मिलना होगा तो झारखंडै में मिलेंगे। ई यूपी का धरती अब प्रेम के लिए ठीक नहीं है।

अच्छा बाय।

आप ही की 
फूलमतिया
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