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'न्यू इंडिया' के नागरिक का ख़त PM मोदी के नाम, अब 'अच्छे दिन' बर्दाश्त नहीं हो रहे हैं

-अतुल सक्सेना 'बागी'

आदरणीय मोदी जी,
यहाँ कुछ कुशल नहीं है, पर आशा करता हूँ आप कुशल पूर्वक होंगे. मोदी जी, बहुत दिन से नौकरी बदलने की सोच रहा था पर आपकी नोटबंदी ने कम्पनियो की कमर तोड़ दी, ज़िसकी भरपाई उन्होंने नौकरियों की संख्या कम कर और वेतन बढ़ोतरी रोककर करने की कोशिश की है.

अब इस हालात में प्रधान सेवक जी नौकरी तो नहीं बदल पाऊंगा, जो नौकरी है उसे ही कम वेतन में बचाने की जुगत में हूँ. पर आशा करता हूँ कुछ फायदा तो आपकी नोटबंदी से हुआ ही होगा. आपके प्रधान अर्थशास्त्री श्री जेटली जी के मुताबिक ज्यादा टैक्स वसूला जाना ही भ्रष्टाचार खत्म होना है. वो कहते हैं तो ठीक ही होगा ! आप भी उनकी ही थ्योरी को ठीक मानते होंगे?

नौकरी नहीं बदल पाये तो क्या, आय कम है तो क्या, आम जीवन की ज़रूरतें पूरी करने के लिये 28% टैक्स देना हो और फिर उस कम पड़ती आय पर भी टैक्स देना पड़े तो भी क्या? अंग्रेजों को भी तो ऐसे ही टैक्स देते थे कि दम ही निकल जाये.

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मोदी जी, आय पूरी ना पडे फिर भी कभी साल छह महीने में कुछ करके पत्नी और बच्चों को नजदीक के औसत मॉल के फूड कोर्ट में खाना खिला देते थे. अब बताया जाता है कि पत्नी एवं बच्चों का मन रखने को यह साल छह महीने का खाना लग्ज़री श्रेणी में आ गया है. आपने इस खाने-पीने पर भी टक्स बढ़ा दिया है. कोई बात नहीं, अब नहीं ले ज़ायेंगे पत्नी बच्चों को लग्ज़री लन्च कराने.

मोदी जी, हमारी पत्नी जो रसोई में घुटी जाती है, कभी-कभी अपने माता पिता से मिलने भारतीय रेल से मायके चली जाती थी. आपको तो शायद मालूम भी नहीं होगा, बुलेट ट्रेन में जो घूमते हैं आप. पर हमको अपनी पत्नी के वो कभी कभी मायके जाने के लिये रेलवे का आरक्षण कराना होता है. अब चूँकि आपके डिजिटल भारत में इंटरनेट पर तत्काल टिकट कराना एक मुश्किल काम है, इसलिये हम पूरी-पूरी रात रेलवे की आरक्षण खिड़की पर लाइन में खड़े होकर-बैठकर-नींद में जागकर खिड़की खुलने का इंतजार करते थे.  अब आपने रेलवे का किराया इतना बढ़ा दिया है कि पत्नी को मायके भेजने में ही हमारी कमर टूट जाये तो यह मायके जाने का सिलसिला भी बन्द हो गया है.

चलिये अच्छा ही है, वैसे भी भारतीय रेल अंग्रेजों के ज़माने की पटरियों पर दौड़ती है और कभी भी पलट जाती है, तो जान बचेगी. फिर रेल का वो अधपका महंगा खाना खाने से भी जान छूटेगी और जो रेल में कभी भी आपकी सहयोगी संस्थाओं के जो मनचले घूमते हैं, उन से भी सुरक्षा होगी.  आखिर रेलवे पुलिस को और भी काम हैं, 'मान्यता प्राप्त' मनचलों को पकड़कर उन्हें अपनी नौकरी थोड़े गंवानी है.

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मोदी जी, आपका हार्दिक आभार कि आपने सब्जियों के दाम को कम करने के लिये कोई महत्वपूर्ण कदम नहीं उठाया और आटा दाल के दाम बढ़वा दिये.  ऐसा कर आपने हमारी सेहत का ध्यान रखते हुए अप्रत्यक्ष तौर पर कम खाने को बाध्य किया है. वैसे भी सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने पर कभी भी आक्सीजन खत्म हो जाने का खतरा है और निजी अस्पतालों में तो दवा के नाम पर लूट है. फिर निजी अस्त्पताल भले ही सरकार से जमीन रियायती दामों पर लें, पर गरीबों की सस्ती ओपीडी नहीं चलाते. अब आप कहां यह सब देखेंगे. और आप देखेंगे तो बुलेट ट्रेन कौन चलायेगा?इसलिये गरीबों की सेहत का ध्यान रखते हुए खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ाने हेतु साधुवाद.

मोदी जी, पर्यावरण की रक्षा के लिए भी आपका सहयोग अभूतपूर्व है. आपने पेट्रोल-डीज़ल के दामों को इतना बढ़वा दिया कि घूमने फिरने की हिम्मत ही नहीं होती. जब गाड़ी चलेगी ही नहीं तो पर्यावरण पर दुष्प्रभाव भी नहीं होगा. धन्य हैं आप. हालांकि पेट्रोल डीज़ल के दाम बढ़ने से खाने पीने की भी वस्तुयें महंगी होंगी और यही आप चाहते थे. आखिर हमारी सेहत का इतना ख्याल जो है आपको.

आदरणीय मोदी जी, आप बेहतर जानते हैं कि ज़िन छोटे-छोटे फ्लैटों में हम बमुश्किल रहते हैं वहाँ कोई जानवर (गाय-भैंस इत्यादि) घूमता मिले तो भी उसको मुश्किल से ही कुछ खाने को मिलेगा और उसका जीना मुश्किल हो जायेगा. इस समस्या के समाधान हेतु आपका लाया तरीका बेजोड़ है. आपने अपने सहयोगी संगठनों के क्रांतिवीरों के माध्यम से इतना खौफ़ फैला दिया कि अब इस प्रकार के जानवरों को पालने से लोग डरते हैं, आखिर  कौन पहलू खान की मौत मरना चाहेगा. उस पर फिर पुलिस भी आपके 'सखा संगठन' के लोगों के खिलाफ जांच नहीं करेगी. इससे तो अच्छा है ना पालो. हमारे आस पास के लोगों ने भी पालना बंद कर दिया है. 'न्यू इंडिया' में तो सब थैली का दूध पीते हैं.

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मोदी जी, एक निवेदन है, चाहे डॉलर कभी रुपये के मुकाबले नीचे ना आये, चाहे कितनी भी महंगायी बढ़ा लीजिये, चाहे अंग्रेजों की तरह टैक्स वसूली बढ़ा लीजिये पर अन्नदाता किसान को मरने से बचा लीजिये. कम से कम उस पर रहम खा लीजिये और अपने मित्र आडानी अम्बानी से फुरसत निकाल कर उसके कर्जों को माफ करने का कोई प्रावधान कर दीजिये. चाहे हमारी थाली से आप एक रोटी और छीन लीजिये पर अन्नदाता को आत्महत्या करने से बचा लीजिये.

आपके 'न्यू इंडिया' का 
एक मिडिल क्लास नागरिक 
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