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पुरुषों के नाम खुला खत, कभी सोचा है आपकी पत्नी को हर बात से इतनी शिकायत क्यों है?

- सुनीता पाण्डेय

प्रिय पुरुषों,
यूं तो स्त्री मन की थाह स्वयं भगवान भी नहीं ले पाये कभी, फिर भी आप लोगों से मेरी सहानुभूति है. एक स्त्री होने के नाते कुछ टिप्स दे रही हूँ. ठीक लगे तो आज़मा लेना. यह खत हर उस पुरुष के नाम है जो या तो शादीशुदा है या  किसी लड़की के साथ लिव इन में है या जो विवाहित होने का इच्छुक है. जो बातें  आप पर लागू  हों उन्हें चुन और गुन लीजिएगा.

अगर आप संयुक्त परिवार में रहते हैं मतलब यदि आपकी माँ और आपकी पत्नी साथ रहते हैं तो या तो आप सैंडविच बने हुए ही होंगे या इसकी बहुत प्रबल संभावना है, इसलिए मेंटली इसके लिए तैयार रहें. अधिकतर पुरुषों के शाम के समय घर से बाहर रहने का यही कारण है. पर रणछोड़ दास मत बनिए. अगर आप माँ और पत्नी दोनों की एक दूसरे को लेकर शिकायतों से परेशान आ गए हैं तो थोड़ा बेहतर  दम उठायें. एक बार दोनों को साथ लेकर बैठिए और दोनों से बिलकुल शांत भाव से पहले दोनों से एकदम ईमानदारी से एक दूसरे की  अच्छाइयाँ बताने को कहिए. इसकी लिस्ट बना लें. देखिएगा बाज़ी यहीं से आपके फ़ेवर में होनी शुरू हो जाएगी.

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पॉज़िटिव नोट से शुरू हुई बात पॉज़िटिव दिशा में ही बढ़ेगी. फिर जब दोनों एक दूसरे की अच्छाई बता चूकें तब उनसे एक दूसरे की कमियाँ बताने को कहें. अगर आपको लगता है कि यह काम एक दूसरे के सामने नहीं हो सकता तो अलग अलग बैठाकर बताने को कहें और इन सब बातों को भी लिस्ट में लिख लें. अब इन कमियों का  निवारण भी उन्हीं से पूछें. बीच बीच में एक पक्ष द्वारा दूसरे पक्ष के लिए कही गयी अच्छाइयों का भी ज़िक्र करते रहें. देखिएगा, समस्या चुटकियों में हल हो जाएगी....

होता क्या है न कि वे दो महिलाएं हमेशा एक साथ रहती हैं. चौबीसों घंटे तो नेचुरली उनमें खटपट तो होगी ही. चूंकि आपकी ही वजह से वे दोनों जुड़ी हैं तो शिकायतें भी आपसे ही करेंगी. चूंकि आप दोनों के बराबर प्यार करते हैं सो आपको समझ नहीं आता कि इस मामले को कैसे सुलझाया जाय सो या तो आप उन पर बरसते हैं या घर छोड़ कर बाहर निकल जाते हैं जो कि समस्या से भागने का बहुत ही आसान रास्ता है.

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एक बात का ध्यान रखिए कि हमारे भारतीय परिवेश में मेरे खयाल से आज भी जब कोई लड़की शादी कर के अपने ससुराल आती है तो वह चाहे कितनी भी पढ़ी लिखी, कामकाजी क्यूँ न हो पर नए परिवार को अपनाने की चाह ही होती है उसके मन में. वह एकदम गीली मिट्टी के समान होती है. सो आपको और आपके घर वालों को भी यह बात मालूम होनी चाहिए कि उसे आपको किस तरह मोल्ड करना है. शेप देना है. ध्यान रखिएगा. समय के साथ वह मिट्टी सूखती जाएगी और जो भी शेप उसे आपने और आपके परिवार वालों ने दिया है वह उसी में ढल जाएगी. अब यह आप पर है कि आप उसे अपनी मनचाही आकृति में ढालते हैं या फिर उसे बार बार तोड़ मरोड़ कर उसकी आर्द्रता को यूं ही खत्म कर देते हैं. फिर आप शिकायत नहीं कर सकते कि इसका तो शेप ही बिगड़ गया है और यह किसी काम की नहीं.

यह बात खूब अहम है कि आजकल के जमाने में लड़कियों को भी उनके माँ बाप उसी प्रकार पालते हैं जैसे कि वे लड़कों को पालते हैं. आप चाहें तो अपनी बहन का उदाहरण ले सकते हैं. मतलब उसके भी ऐशोआराम में कोई माँ बाप कमी नहीं रखते हैं. अमूमन आजकल लड़कियां भी घर के काम नहीं करती हैं क्योंकि अधिकतर घरों में काम वाली बाइयाँ होती हैं. मैं जनरल मध्यम वर्ग की बात कर रही हूँ. सो ध्यान रहे कि वह आपके घर सिर्फ काम वाली बाई नहीं बन कर आ रही है. यह बात आप भी समझें और अपने घर वालों को भी समझाएँ. वह खुद आगे हो हो कर काम करेगी यदि उसे सब तरफ से प्रेम प्यार की सौगात मिलती रहेगी. पर उसके आराम का ध्यान रखना आपकी  ज़िम्मेदारी है.

शादी होने के कुछ सालों बाद अगर पत्नी घर से बाहर निकलने  को. आर्थिक स्थिति ठीक होते हुए भी छोटी मोटी नौकरी करने को या बाहर जाकर कुछ कोर्स करने को  बार बार कह रही है तो यह आपके अलर्ट होने का समय है. अब आपको समस्या की जड़ में जाना होगा. यह देखना होगा कि क्या कारण है कि वह घर से बाहर जाना चाह रही है? हो सकता है कि घर में कुछ फ़ैक्टर ऐसा है जो उसका मन घर में नहीं लगने दे रहा. वह घर के किसी अन्य सदस्य का उस से व्यवहार भी हो सकता है या फिर आपकी पत्नी के प्रति उदासीनता भी. अवलोकन करिए.

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अगर आपको यह लगता है कि आपकी पत्नी/ माँ  खूब नैगिंग है मतलब हर वक्त किसी न किसी बात का रोना लेकर बैठी रहती है तो समझ जाइए कि जो बात वह कहना चाह रही है, सब उसे अनसुना कर दे रहे हैं. उसका बस नहीं चल पा  रहा स्थिति ठीक करने में, वह अपने आपको असहाय पा रही है, इसलिए उसका बस सिर्फ बोलते रहने पर ही चलता है और वह सबको सिर्फ खरी-खोटी सुनाती ही रहती है.

साथ रहना शुरू करते हुए आपने एक दूसरे के साथ जो सपने देखे थे या शादी के समय जो वचन लिए थे उन्हें रिवाइज़ भी करते रहें समय समय पर. सुबह और शाम टीवी और काम, क्यूँ नहीं लेते पिया प्यार का नाम. अगर बीवी ने यह गाना गुनगुनाना शुरू कर दिया है तो फेसबुक छोड़ो और बीवी पर ध्यान दो. जब जागो तभी सवेरा. अगर आपकी शादी को पचास साल भी क्यूँ न हो गए हों. शुरुआत तो कभी भी की जा सकती है, घर की महिलाओं के मन की थाह लेने की.

भूल चूक लेनी देनी...
आपकी शुभाकांक्षी
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