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नोटबंदी से वेश्यावृत्ति घटाने वाले रविशंकर बाबू, इस बार 'जोकर ऑफ़ द वीक' आपके नाम

 -नीलोत्पल मृणाल

माननीय मंत्री महोदय रविशंकर प्रसाद जी,
मैं मूलतः बिहार से हूँ और झारखण्ड के संथाल परगना में सुदूर देहात में रहता हूँ। मैं हमेशा सरकार पे भरोसा करने वाला अच्छा नागरिक रहा हूँ। इसी नाते सरकार ने अपने स्कूल के माध्यम से जितना पढ़ाया लिखाया केवल उतना ही पढ़ लिख पाया और अपनी ओर से ज्यादा पढ़ लिख कर काबिल बनने की कोई प्राइवेट कोशिश नहीं की। युवा हूँ और 2014 से पहले भी बेरोजगार था और 2014 के बाद भी भयंकर बेरोजगार हूँ और फ़ख्र करता हूँ कि जो भी हूँ सरकारों की बदौलत ही हूँ।

बेरोजगार होने के कारण हम सब युवाओं का गांव में एक ही काम रहा है, दिन भर बैठ के गांजा पीना और अच्छे दिन का इंतज़ार करना। बचपन से ही भांग, गांजा एवं शुद्ध किस्म का ताड़ी सेवन करता रहा हूँ। आप फेसबुक पर मेरे पोस्ट और ख़ास कर प्रधान प्रचारक with pm also के बारे में जब पोस्ट पढ़ेंगे तो आपको यकीन हो जायेगा कि मैं किस लेवल पर जा के गांजा ताड़ी पीता हूँ।

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हम सभी गांव के दोस्त कक्षा 3 से इसका सेवन करते हैं। हम अक्सर इलाके के बड़े बड़े चिलमबाज़ को चुनौती देते आये हैं कि है कोई हमारे जोड़ का नशेड़ी? पर अभी कल जब हम सभी बड़े शान से गांजा पी रहे थे तभी किसी ने आपका बयान दिखाया नोटबंदी पर, "नोटबंदी से देह व्यापार में कमी आयी है।"  

ये बयान पढ़ते ही हमारा घमंड चूर चूर हो गया सर। मेरा एक दोस्त चिलम छोड़ कूद के मोबाइल छीना, "मुझे फोटो दिखाओ गुरुवर की" हम सब भी भौचक्के थे कि ये कौन आ गया हम से टक्कर लेने मैदान में। तस्वीर देखी तो पहचान गया। देखा आप थे। हम सभी दोस्तों ने तत्काल अपनी चिलम और ताड़ी की सात बाल्टी आपके तस्वीर के आगे समर्पित कर रख दी और सबने जोर से जयकारा लगाया "हमारा गुरुवर, बाबा रविशंकर"  

सर, सही बता रहा हूँ कि 20 साल से पीने खाने के कैरियर में हमारे ग्रुप को इतना हाई लेवल चुनौती पहली बार मिला है सर। मतलब हमलोग तो चौबीसों घंटे पी के भी इस लेवल पर नहीं पहुँच पाये सर। मेरे संपर्क में कई लाल, नीले, पीले, भगवे सलाम प्रणाम वाले भी साथी हैं। उनके बीच भी इस टक्कर का माल मिलना कभी नसीब नहीं हुआ सर। हम सभी साथियों ने कल ही तय किया कि आपको अपना कुलगुरु मान चिट्ठी लिखें और पूछे कि आखिर आप लोगों का माल कहाँ से आता है जो इतना ज्यादा हाहाकारी असरकारी मौज देता है।

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सर, आप देश के मंत्री हैं, आपको हमने चुना है इसलिए हमारा ये अधिकार है कि हम जान पायें कि हमने जिसे चुन कर देश चलाने भेजा है उसके भेजे में किस क्वालिटी का माल भरा जा रहा है और ये माल हम आम चिलमधारियों के लिए क्यों नसीब नहीं। सर, आपकी सरकार कहती है कि "सबका साथ,सबका विकास " तो फिर इस विकास यात्रा में हम लोग को अकेला छोड़ आप अकेले अकेले सारा जड़ी क्यों फूंक देते हैं सर?

सर, हम जानते हैं कि आपलोगों का अपना नेटवर्क है और अभी पार्टी के ही नेताओं में बांटा बांटी करते माल खत्म हो जाता होगा। मध्य प्रदेश में जिस तरह शिवराज मामा जी ने अपनी सड़कों को अमेरिका से बेहतर बताया वो बताता है कि आप लोग जिस जड़ी का सेवन करते हैं वो जड़ी खुद आदि देव शिव जी के जड़ी से भी हज़ार गुणा ज्यादा असरकारी है।

कल ही एक काली सूची में नाम आने पर आपके एक सांसद ने पत्रकार के सवाल पूछने पर तख्ती पे लिख के बताया"मैं भगवत गीता के यज्ञ में सात दिन के लिए मौन हूँ" मतलब इस लेवल का सर्कस? इस लेवल की जोकरी?
सर प्लीज़, देखिये हम युवा के बारे में अभी कल ही आपने ही कह दिया कि बेरोजगार केवल वही लोग हैं जो अयोग्य हैं, तो अब इतने बेरोजगारी में गांजा ही सहारा है जिसे पी पा हम अपनी जिंदगी घसीट घिस के ख़तम कर लें और बचे रहें तो 2019 में आपको वोट दे सकें। कम से कम इतने के लिए तो फरियाद सुन लीजिये और हमारी आखिरी इच्छा पूरी कर दीजिये कि हम नरक में आपके आने पर पहले से जयकारा लगा गेट पर खड़ा रहेंगे और बाकि दल के नेताओं से कह सकेंगे कि बाबा रविशंकर जी के कारण ही हमलोग भी उस उच्च स्तरीय जड़ी का सेवन कर दुनिया से विदा हुए थे।

अच्छा अब जरा होश की बात भी सुन लीजिये सर। सर, देश पर कल कोई और राज कर रहा था, आज आप हैं और कल कोई और होगा। राज तो हमेशा कोई नहीं रहा, रह जाता है उसका किया धरा। आपको निम्बू चाट के बड़े होश हवास में ये याद दिलाना चाहता हूँ कि, आप भारत जैसे विशाल और गरिमयी देश के मंत्री हैं। एक समय ठीक ठाक कमाऊ वकील भी रह चुके हैं। पर सर, किसी बड़े लोकतांत्रिक देश के मंत्री होने और किसी व्यापारी राजा के दरबारी होने का फर्क समझाइये खुद की आत्मा को।

नोटबंदी जैसे महाप्रभावी मुद्दे पर ये क्या खा पी के बयान दिए थे आप सर? क्या इस देश को अब इतना भी उम्मीद नहीं करना चाहिए कि देश का मंत्री भले अपने निर्णय के पक्ष में बोलेगा लेकिन तार्किक तो बोलेगा, मूर्खों की तरह तो नहीं न बोलेगा कम से कम। दुनिया का कौन अर्थशास्त्री नोटबंदी के प्रभाव पर उत्तर मांग रहे लोगों को ये जवाब दे उसका फायदा बताएगा कि, नोटबंदी से देह व्यापार कम हुआ और ये इसकी सफलता है। महराज याद हो तो बताइये कि क्या इसलिए किया था नोटबंदी?

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मेरा देश वाकई बदल रहा है, हम अंदर से हिंसक और पैशाचिक हो रहे हैं, बाहर से सभ्य और धार्मिक !

रवि बाबू, वकील हैं न आप? जरा भी नहीं सोचे, कि जिस नोटबंदी के लिए 50 दिन मांग देश का नक्शा बदल देने की कसम खाई थी एक बातूनी ने वो उसके 364 दिन बाद भी उसी मुद्दे पर कुछ बोलने नहीं आया। दुनिया का सबसे बातूनी प्रधानमंत्री जिस मुद्दे पर मुँह खोलने में 56 इंच का सीना सिकुड़ के रह गया और जिस मुद्दे पर दुनिया के एकमात्र जीवित कौटिल्य उर्फ़ चाणक्य कुमार शाह चूं नहीं बोले उस मुद्दे पर आपको अपनी बेवकूफ़ी दिखाने का क्या प्रसाद मिला?

रवि प्रसाद जी, राजनीति का स्तर ये है कि ये रोज नया सर्कस दिखाती है और रोज़ नये जोकर से मिलाती है। आपको बस यही कहना चाहता हूँ कि इस बार जोकर ऑफ़ द वीक का खिताब आपको जाता है जो आपने अपने ही मामू MP वाले से छीना है। बधाई। जय हो। [अगर आप भी लिखना चाहते हैं कोई ऐसी चिट्ठी, जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो हमें लिख भेजें- merekhatt@gmail.com. हमसे फेसबुकट्विटर और गूगलप्लस पर भी जुड़ें]
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