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पीएम मोदी के नाम दुखियारे भक्त की चिट्ठी, बस करें कितना ज़लील करवाएंगे हमें

-कुलदीप कुमार

बस करो मोदी जी और कितना ज़लील करवाओगे हम भक्तों को? अब तो फेसबुक लॉगिन करने में भी झिझक होती है. इस तरह तो कोई दिल टूटा आशिक भी अपनी बेवफा मेहबूबा को सरेबाजार रूसवा नहीं करता जैसे आप कर रहे हैं.

नोटबंदी और जीएसटी को तो जैसे तैसे सम्हाला था. अब आपने फिर से 100% एफडीआई का नया झमेला डाल दिया. समझ में नहीं आ रहा है कि अब इसे कैसे डिफेंड करें? कुछ जवाब देने का मन बनाओ भी तो ये ससूरे वामिये, आपिये, कांगिये आपका पुराना वीडियो दिखा देते हैं कि कैसे आपने एफडीआई का विरोध किया था और सुषमा ताई कैसे रात भर थाली बजाकर भांगड़ा कर रही थीं 49% एफडीआई के विरोध में. आपने तो सीधे 100% एफडीआई को मंजूरी दे दी.

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एक झमेला निबटता नहीं कि तुरंत दूसरा बवाल खड़ा कर देते हो. अभी तोगड़िया जी को मारना ही था तो जान से मार देते. हम एड़ी चोटी का जोर लगाकर साबित कर देते कि हिंदू शेर को मारने में पाकिस्तानी आतंकवादियों का हाथ है. अधमरा करके छोड़ने की क्या जरूरत थी? कम से कम वो प्रेस कॉन्फ्रेंस तो नहीं कर पाता. अब तो रायता इस बुरी तरह फैल गया है कि समेटा भी नहीं जा रहा.

इस बीच एक राहत की खबर मिली थी कि आपने मुल्लों की हज सब्सिडी बंद करवा दी. हम जश्न की तैयारी कर ही रहे थे कि स्साले मुल्लों ने पहले ही जश्न मनाना शुरू कर दिया. स्साले हमारे टैक्स के पैसे से हज पर जाते थे और अब नाशुक्रे ये कह रहे हैं कि हजयात्रा के भरोसे एयर इंडिया चल रही थी. फिर भी हम थोड़ी तसल्ली कर ही रहे थे कि तभी एक उड़ती उड़ती खबर मिली कि आप हज सब्सिडी बंद करके उसकी जगह 650 करोड़ रुपये मुल्लों को पढ़ाई के लिए दे रहे हो. कसम से अपना सिर पीटने की इच्छा हो रही है.

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आपने तो जैसे रोज-रोज हम भक्तों को बेइज्जत करवाने की कसम खा ली है. नेतन्याहू को फिल्म पद्मावती का घूमर डाँस दिखाने की क्या जरूरत थी? आपको गुजरात चुनाव जिताने के लिये हमने पद्मावती के नाच गाने का कितना विरोध किया था. अब हम दुनिया को क्या मुँह दिखाएँ? उपर से कोढ़ में खाज ये कि पेट्रोल और डीजल के दाम फिर से बढ़ा दिए. हम मानते हैं कि ये जो कुछ भी आप कर रहे हो ये सब देशहित में है, लेकिन दुनिया को क्या जवाब दें?

आपकी इन्हीं हरकतों से तंग आकर हमारे ही एक भक्त भाई प्रकाश पांडे ने आत्महत्या कर ली. उसने भी आपको सही साबित करने के लिए क्या कुछ नहीं किया था. कभी कभी तो मन करता है कि मैं भी प्रकाश पांडे की तरह आत्महत्या कर लूँ. आखिर कब तक लोगों के ताने सुनूं? आपके लिए लोगों से लड़ते लड़ते थक गया हूँ. फिलहाल आत्महत्या तो नहीं कर रहा हूँ. लेकिन एक दो साल के लिए आईडी डिएक्टीवेट करके जा रहा हूँ. उम्मीद है तब तक आप सब कुछ ठीक कर दोगे. तब बताऊंगा इन वामियों, कांगियों, आपियों और मुल्लों को.
तब तक के लिए
जय श्री राम
आपका एक दुखियारा भक्त 
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