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''एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के 80 प्रतिशत मर्दों की #MeToo से नींद हराम हो गई है''

-शमा सिकंदर

मैं यही कहना चाहूंगी कि #MeToo इंडस्ट्री में सालों से है। आज फर्क सिर्फ इतना पड़ा है कि इस मुद्दे पर महिलाओं के खुलकर बात करने के बाद मर्दों की जमात टेंशन में है। अगर मैं कहूं कि 80 प्रतिशत मर्दों की नींद हराम हुई है, तो गलत नहीं होगा। हमेशा से महिलाओं का शोषण होता रहा है और उन्हें दबाया जाता रहा है। उनका तरीका अलग होता है। मैं तो ऐसे अनेक अनुभवों से गुजरी हूं, मगर मेरी स्पिरिचुअल ट्रेनिंग ऐसी हुई है कि मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहती हूं। 

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मैं जब इस क्षेत्र में आई थी, तो महज 13-14 साल की थी। उस वक्त समझ में नहीं आता था, जब कोई बहाने से जांघ या पीठ पर हाथ फेरता था। असल में घर की बुरी आर्थिक स्थिति के कारण छोटी उम्र से काम करना पड़ा था। फिल्मी पार्टियों की चमक-दमक देखकर मेरे पिताजी को लगा कि इस इंडस्ट्री में पैसा और सम्मान दोनों ही हैं। फिर, मेरी एजुकेशन तो हुई नहीं थी, मगर कला ही सहारा थी। मुझे याद है कि किसी के बुरे बर्ताव पर जब मैं आवाज उठाती, तो इंडस्ट्री की एक जानी-मानी हेयर ड्रेसर मुझसे कहती कि इतने नखरे मत करो, वरना तुम्हें काम नहीं मिलेगा। यही नहीं, मुझे 'कॉम्प्रोमाइज' न करने की सूरत में चार प्रॉजेक्ट्स से निकाल दिया गया था। 

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मैं सेट पर अपने पिताजी के साथ जाया करती थी और अक्सर मुझसे कहा जाता था कि मैं शूटिंग पर अपने पिताजी के साथ क्यों आती हूं। एक बहुत बड़े निर्देशक हैं। मैं उनका नाम नहीं लेना चाहूंगी, मगर वे महिला प्रधान फिल्में बनाने वाले प्रतिष्ठित फिल्मकारों में से हैं। साइन करते वक्त वह मुझे बेटा-बेटा कह रहे थे, मगर एक दिन उन्होंने मुझसे कहा कि वह मुझसे अकेले में मिलना चाहते हैं। मैं पिताजी के साथ गई और उन्होंने मुझे सांत्वना दी कि वह मेरे साथ हैं। वह लॉबी में बैठ गए। उस निर्देशक ने मुझसे सीधे-सीधे पूछ लिया कि मुझे फिरोज खान ने लॉन्च किया है, तो क्या उन्होंने मेरे साथ कुछ भी ऐसा-वैसा नहीं किया? 

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मुझे बहुत अजीब लगा, मगर मैंने उन्हें साफ-साफ कह दिया कि फिरोज खान मुझे बेटी की तरह ही मानते थे। इसके बाद वह डायरेक्टर इधर-उधर की बातें करने लगा और कहने लगा कि जिस लड़की ने उसका दिल तोड़ा था, उसकी झलक उन्हें मुझमें मिल रही है और अब मैं उनके दिल का सहारा बन जाऊं। इसी बीच उनकी बीवी अपने कुत्ते को टहलाते हुए आईं, तो उन्होंने झट से बात बदल डाली। बहरहाल, जब मेरे सामने उनकी दाल नहीं गली, तो अगले दिन उन्होंने मुझे अपनी ऐड फिल्म से निकाल बाहर किया। उस वक्त उस ऐड से निकाला जाना मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी। मैं कई दिन तक रोती रही और डिप्रेशन में रही।


मुझे लगता है कि अगर मुझे बच्चा चाहिए, तो शादी की क्या जरूरत है? शादी मैं तभी करना चाहूंगी, जब मेरा मन चाहेगा। जब मैं उसके लिए तैयार रहूंगी। शादी जीवन की खुशी के लिए होनी चाहिए, किसी शर्त के लिए नहीं। आज बच्चे पैदा करने के सरॉगसी जैसे और भी कई तरीके हैं। मैं अब धारावाहिकों में काम नहीं करना चाहती। देखिए, टीवी शोज में में जिस तरह बंधुआ मजदूरों की तरह काम करवाया जाता है, मैं उस तरह का काम नहीं कर सकती। मैंने जिंदगी को जीना सीख लिया है। मैंने जिंदगी में अपने काम, दोस्तों, घर-परिवार और घूमने-फिरने के अलग-अलग कम्पार्टमेंट बना रखे हैं और मैं हर कम्पार्टमेंट को खुलकर जीना चाहती हूं।

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यह सच है कि मैं अब अपने मनमुताबिक काम करना चाहती हूं। जैसे मैंने अपनी वेब सीरीज माया में छोटी-छोटी कहानियों को दर्शाया था और उसे लोगों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला था। मैं अब अपने काम के जरिए लोगों की जिंदगी में बदलाव लाना चाहती हूं। मुझे लगता है कि काम और निजी जिंदगी में संतुलन बनाना बहुत जरूरी है। एक दौर था, जब पैसे कमाने के लिए मैं दिन-रात काम किया करती थी। मुझे नींद नहीं मिलती थी और मैं हर वक्त काम में डूबी रहती थी। तब हमारे पास पैसे नहीं होते थे। फिर एक वक्त ऐसा आया, जब मैं डिप्रेशन का शिकार होकर मौत की कगार पर पहुंच गई। तब मुझे लगा कि मैं खुद को क्यों मार रही हूं। मेरी आत्मा की शांति के लिए मुझे क्या करना चाहिए, अब मैं अपनी खुशी के लिए जिंदगी जीना सीख गई हूं।

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प्यार के फ्रंट पर मैं मालामाल हूं। मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं कि मुझे जेम्स जैसे साथी मिले। मैं एक ऐसी लड़की हूं, जो बि्ना प्यार के रह ही नहीं सकती। मुझे प्यार का ऐम्बैसडर बना दिया जाना चाहिए। जेम्स मेरी छोटी-छोटी बातों का खयाल रखते हैं। वह बिजनेस के क्षेत्र में हैं और हम लोग पिछले चार साल से रिलेशनशिप में हैं। मेरी फ्रेंड्स मेरी किस्मत पर रश्क करती हैं कि मुझे इतना कमाल का चाहनेवाला कैसे मिल गया। (nbt.in पर प्रकाशित इंटरव्यू का संपादित अंश, साभार)

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