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डियर दोस्त, अपने पर ही फिदा हो जाना और कभी निराश होकर खुद से ही रूठ जाना

-आशुतोष तिवारी

डियर दोस्त,
मैं जब यह लिख रहा हूँ, तुम मेरे सामने नहीं हो। तुम कुछ महीनों उस डेस्क के आस पास भी नहीं होगी, जो छुट्टियों के बाद मेरे लौटने का इंतजार कर रही है। किसी भी तरह से किसी का भी जाना, भले ही वह कम वक्त के लिए हो, मुझे लिखने के लिए प्रेरित करता रहा है। शायद इसी एहसास में शामिल हो कर मैं तुम्हें यह ख़त लिख रहा हूँ।

औरतों के जीवन के इर्द-गिर्द लिखने वाली एक वेबसाइट पर मैंने 'मैडोना' के जीवन के बारे में पढ़ा था। तुम से हुई तमाम बातों के बाद मैं कह सकता हूँ कि तुम्हारे वजूद में एक खूबसूरत मैडोना बिंधी हुई है। अपनी चहनाओं को लेकर ईमानदार, अपनी खूबियों को लेकर गर्व से भरी हुई, अपनी सीमाओं को लेकर चंचल लेकिन थोड़ी सी डरी हुई। हां, तुम ऐसी ही हो।

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लिखते हुए निराश नहीं हूं, लेकिन मैं तुम्हें कभी नहीं बताऊंगा कि मैंने यह तुम्हारे लिए लिखा है

'औरत' के अस्तित्व के प्रति तुम्हारे प्यार ने मुझे प्रभावित किया है। तुमने अपने जीवन में उस बेचैनी को जगह दी है जो खलिस औरत होकर अपनी चुनी हुई ऊंचाइयों तक जाना चाहती है। शुरुआती दिनों में किसी को यह भ्रम हो सकता है कि तुम मिजाज से बेहद सतर्क और कुछ मौकों पर लोगों के साथ थोड़ी सी गुस्सैल हो लेकिन अंततः यदि तुम उसके करीब रही तो वह अपनी धारणा को गलत पायेगा। तुम न सिर्फ संवेदनशील हो, बल्कि अपने आसपास में खास तरह से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वाली एक नजदीक आती मुस्कान और विदा लेती गम्भीरता का बढ़िया तालमेल  हो। तुम अपना पेशा हमेशा ऐसा ही रखना जिनकी ऑफरिंग की छाया में तुम चमकती रहो। तुम बोल सको/लिख सको/पढ़ सको। तुम्हें वो आड़े-तिरछे गोले जरूर याद होंगे जिनमे समुच्चय को आधार बनाकर हम ने तुम्हारे जीवन के बारे में बात की थी।

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मैंने तुम्हें यह पहला ख़त लिखा है। शायद इसीलिए कि तुम उन कुछ लड़कों के बीच एक एकलौती लड़की के तौर पर शामिल रही हो, जिन्होंने मुझे मुश्किल वक्त में अपना कीमती वक्त दिया है। मैं कोरिडोर की वह जाती हुई शाम कभी नहीं भूल सकता जब तुम मुझे अपने जीवन के अनुभवों से जीने के सलीके समझा रही थी। उन सभी शामों के लिए शुक्रिया दोस्त, जिनमें तुमने मुझे निस्वार्थ होकर जीवन की प्रेरणा दी। मेरी एक कमजोरी है कि मैं लोगों से मिलने और खुलने में ज्यादा समय लेता हूं और इसी स्थिति के खातिर मैं तुम्हारे बारे में खुद से कह सकता हूं कि मैं एक बेहतर इंसान से मिला हूं, जो तालीम और रुमानियत का अद्भुत तालमेल है।
आखिर में मैं तुम से वही बात कहना चाहता हूं जो रायना मुझ से कह कर गयी थी। किसी के चाह में रहना बेहद सरल है वैसे ही, जैसे जमीन से आकाश की तरफ उछाली गयी हर चीज का वापस आना। लेकिन जीवन में गति के नियम शब्दशः नहीं लगते। चाहना पर चाह की उम्मीद मत करना दोस्त। खुशियां कभी दूसरों के कंधों और उनकी खुशियों की तिजोरी में मत छुपा देना। वो उन तिजोरियों की चाभियां लेकर कई बार दूर चले जाते हैं। ज़िन्दगी के फैले हुए आकाश पर अपनी खुशियां औऱ तकलीफें खुद गढ़ना। अपने पर ही फिदा हो जाना और कभी निराश होकर खुद से ही रूठ जाना। मैंने जीवन से यही सीखा है दोस्त। अपनी खुशियों का एकमात्र आश्रय  खुद होना ही अच्छा होता है।

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तुम्हारे जहन के सबसे खूबसूरत हिस्से में मैं यूं ही धड़कता रहूंगा

आने वाली चुनौतियां तुम्हें मजबूत बनायें। अपने वजूद से हरदम महकती रहो। अपनी चुनी हुई ऊंचाइयां हासिल करो और मेरी दोस्त! बेहद शुक्रिया, छुट्टियों के कुछ नीरस दिनों में याद करने के लिए। और हां! अपनी भावनाओं को कागज पर लिखने वाली आदत को कभी मत भूलना, वो पन्ने सधी हुई लिखावट के साथ अपनी मंजिलों को बेहद स्पेशल महसूस कराते हैं। 
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