Top Letters
recent

लिखते हुए निराश नहीं हूं, लेकिन मैं तुम्हें कभी नहीं बताऊंगा कि मैंने यह तुम्हारे लिए लिखा है

-आशुतोष तिवारी

मेरी प्रिय,
तुम आज यहां नहीं हो। तुम कल भी यहां नहीं होगी, जब मैं कमरा नम्बर 401 में तुम्हारी स्मृतियों के किस्से कुछ उन लोगों को सुनाऊंगा जो 'ओल्डमॉन्क' का एक हाफ अपने अपने दुखों में डुबा चुके होंगे। मुझे यकीन नहीं होता कि क्या कोई इतना प्यार करने के बाद भी जा सकता है। शायद कहानियों में जाता होगा, या फिर दुनिया का हर रोमियो अपनी जूलियट को हासिल ही कर ले, यह किसी संविधान में तो नहीं लिखा है।

इसे भी पढ़ें...
प्रेमी के नाम एक प्रेमिका का पहला खत, मेरे लिए अब कोई जंग जीतना बाकी नहीं रहा 

मैं सोचता हूं कि क्या मैं तुम्हारे जाने से नफ़रत कर लूं। लेकिन मैं चाह कर भी तुम्हारे जाने से नफ़रत नहीं कर पाता। प्रिय, लगता है कि यह उस बेशुमार मोहब्बत के साथ बेईमानी होगी जिसे तुम मेरे मन  के अस्तांचल तक पहुंचा कर गयी हो। अब मैं तुम से क्या दुनिया के किसी घ्रणित जीव/ कीड़ा /कृमि से भी नफ़रत नहीं कर पाऊंगा। तुम्हारी रूह के तिनके मैंने अपनी देह में हासिल किए हैं। मैंने अपनी आत्मा का सुकून तुम्हारी देह में देखा है। देह और रूह के दार्शनिक अंतर भी मैंने तुम्हारी उन आंखों में मिटते हुए देखे हैं, जब भूटान के किनारे बसे उस इलाके में तुम मेरी आंखों मे देख रही थी।

इसे भी पढ़ें...
प्रिय ! ये रात गहरी हो चली है, सामने टेबल लैंप की पीली रोशनी मेरी नाकामी पर हंस रही है ! 

तुम्हारी चहनाओं का सूरज मेरे जीवन का उजाला है। तुम्हारी चिंताओं का लिहाफ मेरी देह की ताजगी है। मुझे आज भी सर्दियों की वह ठंडी दोपहर याद है। मैं प्यार में खोया हुआ सीढ़ियां चढ़ने में मशगूल था। तुम भी उस पल प्यार में नब्बे के दशक की नायिकाओं सी डूबी थी। इसके बावजूद तुम्हारी सुध मेरे परिवेश में थी। तुमने तंद्रा तोड़ते हुए कहा था- 'स्वेटर तो पहना है आशु? नार्थ में सदियां तेज होती है।'  ऐसे वाकये कई बार हुए हैं। मैं प्यार में डूब कर स्वार्थी हो जाता था। सोचता था कि इन पलों की ठीक से इबादत कर लूं। और तुम! प्यार में डूबी हुई उस आशु के परिवेश की तमाम चिंताएं भी कर लेती थी, जिसको तुम ने देखा भी नहीं था। में तुमसे कैसे नफ़रत कर सकता हूं। ख़ुदा ने मेरे जीवन की किताब में तुम्हारे वरक़ को इसीलिए संजोया था, ताकि मैं उन शांत पलों का भी ठहर कर एहसास कर सकूं, जिससे अब तक तमाम जीवन मरहूम रहा ।


इसे भी पढ़ें...
मुझे नहीं पता था कि मैं तुम्हारे लिए यह लिखूंगा। मैं तुम्हें यह कभी नहीं बताऊंगा कि मैंने यह तुम्हारे लिए लिखा है। अफसोस कि तुम इस ख़त को पढ़ भी नहीं पाओगी, क्योंकि तुम मेरे पास से जाने के बाद हर उस स्पेस से जा चुकी जो तुम्हें इस चलती फिरती दुनिया से जोड़ सकता है। हालांकि मैं इसे लिखते हुए निराश नहीं हूं। ये हसीन एहसास सिर्फ मेरी लकीरों में नहीं आये। दुनिया बदक़िस्मतों से भरी हुई है। न जाने कितनों की हीर उन्हें उनके लिए ही छोड़ कर जा चुकी हैं। यह ख़त वह पढ़ेंगे और अपने भीतर यदि उन्हें किसी अपने के 'जाने' से नफ़रत है तो उसे एक बार फिर बेशुमार मोहब्बत में बदल सकेंगे।

इसे भी पढ़ें...
एक ख़त उस दोस्ती के नाम, जो अब शायद तुम्हारे लिए बेमानी है!

मुझे पता है कि कोई यूं ही नहीं जाता। आकाश के किसी अनाम देवता ने हमारे माथे पर दूर होना यूं हीं नहीं लिख दिया था। दूर जाना उम्मीद का अंत नहीं है। यह हमारे प्यार का फलसफा है प्रिय। जो समय हम ने साथ मिल कर जिया, यह हमारे मुकद्दर में नहीं था। हमने किस्मत के एक क्रूर देवता से इस समय को चुरा कर एक दूसरे पर बेशुमार मोहब्बत उड़ेली है, और यही हमारे प्रेम की जीत है/इश्क का फलसफा है।

तुम्हारा 'तुम'
My Letter

My Letter

Powered by Blogger.