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नसीरुद्दीन शाह के नाम खुला ख़त, जिन्न को दोबारा बोतल में बंद करने का दायित्व हर संवेदनशील नागरिक का है !

-हृदय नाथ

डियर नसीरुद्दीन,
मैं आपको बधाई देता हूं कि परेशानी के आलम में भी आप ने होश हवास कायम रखा और बिना किसी झिझक और डर के मन की बात कह दी. यह जानते हुए भी कि मन की बात अभिव्यक्त करने का सुरक्षित अधिकार केवल और केवल शहंशाह के लिए है।

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कारवां-ए-मुहब्बत वीडियो के वयरल होते ही भक्तजनों और चापलूस मीडिया का कहर टूट पड़ा। राजस्थान के #सेक्युलर मुख्यमंत्री को अजमेर लिटररी फेस्टिवल में आप की भूमिका पर अंकुश लगाना पड़ा। आज भगवा राज में एक आम नागरिक की तुलना में गाय का अस्तित्व महा प्रासंगिक है, यह कहना गुनाह ही नहीं गुनाह-ए-अज़ीम है। एक धर्म विशेष से प्रेरित कट्टरवाद, असहिष्णुता तथा घृणा के वातावरण में अपने धर्म निरपेक्ष बच्चों के भविष्य और उनकी सामाजिक सुरक्षा का प्रश्न, केवल आप की चिंता और चिंतन का विषय न होकर हम जैसे लाखों अभिभावकों की चिंता और चिंतन का विषय है।

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स्वभाविक जिज्ञासा है, ऐसी पृष्ठभूमि में आप की तार्किक अभिव्यक्ति पर इतना हंगामा क्योंकर बरपा हो गया? पहला कारण आप का नाम नसीरुद्दीन है (शाह होना तो वरदान है), दूसरा कारण आप लेफ्टिनेंट जनरल ज़मीरुद्दीन शाह के सगे भाई हैं जिन की अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित पुस्तक "सरकारी मुसलमान" में 2002 के गुजरात नरसंहार से सम्बंधित कुछ तथ्यों का पर्दाफाश हुआ है. किस प्रकार सूचना के बाद भी पूरे 34 घंटे ज़मीरूद्दीन शाह के नेतृत्व वाली सहायता हेतु 3000 सैनिकों की टुकड़ी को अहमदाबाद हवाई अड्डे की परिधि में 34 घंटे रखा गया, जबकि खून की होली में गोलियां बरस रही थीं (We just stayed helplessly in the airfield for almost 34 hours. We could hear gunshots and do nothing!) 

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बहुप्रचारित गुजरात माडल प्रबंधन पर प्रश्न करना भी अपराध की श्रेणी में आता है और दोनों भाइयों का अपराध महा अपराध की श्रेणी में आता है। अंधभक्तजनों को फिल्म सरफरोश में आपका पाकिस्तानी एजेंट गुलफाम हसन का रोल याद है परन्तु फिल्म हे राम में आप का बापू का रोल याद नहीं आ रहा है. कैसी विडम्बना है?

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जिन्न को दोबारा बोतल में बंद करने का दायित्व अकेले आप का नहीं है, बल्कि उन सभी नागरिकों का भी है जो आप की तरह संवेदनशील हैं और आपके साथ चिंता और चिंतन में शामिल हैं। वह सुबह कभी तो आएगी !
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