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बजट स‌े पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली को एक मिडिल क्लास गृहणी की चिट्ठी

- स्मिता सिन्हा 

स‌ेवा में
श्री अरुण जेटली
वित्त मंत्री, भारत स‌रकार

महोदय,
आशा है अब तक बजट को लेकर आपकी तैयारियां पूरी हो चुकी होंगी। यकीनन आप काफी जोश में भी होंगे। आखिरकार यह एनडीए सरकार का तीस‌रा बजट है। हालांकि मौजूदा हालात में बजट भी सरकार के लिये बड़ी चुनौती है। इस बजट पर सारे देश की नज़र है। स‌बको उम्मीद है कि अबकी बार अच्छे दिन ज़रूर आयेंगे। महँगाई की मार से आमजन को राहत मिलेगी। रोज़गार के अवसर युवाओं में उत्साह भरेंगे। बैंकिंग, कृषि और कॉरपोरेट सेक्टर्स के लिये भी लुभावनी योजनाएँ होंगी। हम डिजिटल इंडिया में जी रहे हैं। लिहाजा पूरी उम्मीद है कि देश हाइटेक होने की दौड़ में एक कदम और आगे जायेगा। चौतरफा संरचनात्मक विकास में भी इस बजट से काफी उम्मीदें की जा रही हैं। देश का हर तबका अपनी जरूरत के मुताबिक बजट स‌े उम्मीदें लगा रहा है। मैं भी उनमें स‌े एक हूं।

मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार की गृहणी हूँ और दो बच्चों की माँ।  मेरी चिंतायें घर से ही शुरू होती हैं और घर पर ही आकर ख़त्म हो जाती हैं। मेरी सोच देश के मसले और अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्धों जैसे मुद्दों तक नहीं जाती। सुना है सारे देश से आपको अच्छे बजट के संदर्भ में सुझाव आ रहे हैं, तो मैंने सोचा कि कुछ सुझाव मैं भी दे दूँ। पहली बात जो मुझे अखरती है, वह है टैक्स की दोहरी मार। एक तरफ़ हम इनकम टैक्स देते हैं। दूसरी तरफ़ वैट और सर्विस कर।

मेरा सवाल यह है कि हमसे वसूला गया अप्रत्यक्ष कर कितनी ईमानदारी से सरकार तक पहुँचता है? सरकार और उपभोक्ताओं के बीच कहीं कोई और तो दलाली नहीं खा रहा है? मेरा सुझाव है कि कुछ महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थों एवं दवाओं को वैट मुक्त कर देना चहिये। वित्तमंत्री जी, अगर हम इतने सारे अप्रत्यक्ष कर देते हैं तो हमें प्रत्यक्ष करों में थोड़ी राहत तो मिलनी चाहिये। मेरी गुजारिश है कि इनकम टैक्स की राहत सीमा 2.5 लाख से बढ़ाकर 5 लाख कर देनी चाहिये। इस महँगाई के दौर में घर चलाने में इतने पैसे तो लगते ही हैं।

महोदय, आप कहेंगे खर्चे कम करो,  तो फ़िर आप ही बताएं कि किस क्षेत्र को हम नज़रंदाज़ करें। बच्चों की स्कूल फीस से लेकर पेट्रोल की कीमतें, घर का राशन और स्वास्थ्य सम्बन्धी सारी सुविधाएँ तो महँगी हो रखी हैं। ट्रेन की टिकटें भी अब हमारे बजट में फिट नहीं बैठती। जिस फिल्म की टिकट ज्यादा स‌े ज्यादा 100 रुपये होनी चहिये, वह 300-350 रुपये में मिल रही हैं। आज महँगाई 200% से ज्यादा बढ़ गयी है। स्कूल की फीस में 10% की वृद्धि तयशुदा है। घर का किराया हर 11 महीने में 10% की दर से बढ़ना ही बढ़ना है। घर खरीदना हमारे लिये सपने जैसा ही है। स‌ोचा था होम लोन की दरें कम होंगे, लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी बैंकों 'असहिष्णुता' कायम है।

वित्त मंत्री जी, मुझे पता है कि आपस‌े बहुत ज्यादा की उम्मीद बेवकूफी होगी, क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था घाटे में जा रही है। हमने वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ से भी कर्ज़ लिया है। दिल्ली मेट्रो को वित्तीय सहायता देने वाले देश जापान का उधार भी हम पर बकाया है। पर हम भी क्या करें? कुछ माँगें रख रही हूं आपके स‌ामने।

1. आयकर छूट सीमा 2.5 लाख से बढ़ाकर 5 लाख  कर देनी चाहिये। 10 लाख तक की इनकम पर 10% से ज्यादा कर लागू नहीं हो।
2. बच्चों की पढ़ाई के लिये कम से कम 4000 रुपये महीने मिलने चाहिये। आज की तारीख में किसी भी स्कूल की फीस 1200 रुपये नहीं है।
3. वाहन भत्ता 800 रुपये मासिक से बढ़ाकर 3000 रुपये कर देना चाहिये।
4. स्वास्थ्य सम्बन्धी राहत सीमा 15,000 से बढ़ाकर 50,000 रुपये तक होनी चाहिये।
5. होम लोन के बढ़ते ब्याज पर भी छूट मिलनी चाहिये।
6. ट्रेन का स‌फर सस्ता होना चाहिये।
7. ज़रूरी वस्तुओं को सस्ता होना चाहिये। लग्जरी और नशीली चीजों के दाम बेशक बढ़ा दें।

कुल मिलाकर मैं सिर्फ़ इतना कहना चाहती हूँ कि मेरे लिये अच्छे दिन का मतलब अच्छा खाना और कम पैसों में अच्छा जीवन निर्वाह करना है। मुझे जरूरत है अपने बच्चों के लिये अच्छे सरकारी स्कूल की, बशर्ते वह स्कूल शिक्षा की स‌ारी   गुणवत्ता और मानदंडों पर खरा उतरता हो। चाहती हूँ सही दर पर चौबीसों घंटे बिजली और पानी। मुझे जरूरत है अपने परिवार के लिये सस्ते और अच्छे भोजन की। मैं चाहती हूँ ऐसा घर जिसके लोन के बोझ में हम इतना न दब जायें कि दूसरे खर्चे मुश्किल हो जाएं। मुझे चाहिये तो बस अच्छे सरकारी अस्पताल, जहाँ सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएँ मुहैया करायी जाएं। चाहिये तो बस अच्छा और सस्ता पब्लिक ट्रांसपोर्ट। मैं सिर्फ़ अपने परिवार को खुशहाल और सुरक्षित रखना चाहती हूँ। मुझे चमकती हुई नीतियां नहीं, बल्कि ठोस, सक्षम और पारदर्शी योजनाओं वाले बजट की दरकार है। आशा है आप इस उम्मीद का खयाल रखेंगे।

घरेलू बजट से जूझती 
एक गृहणी 
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