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राहुल गांधी को एक कांग्रेस समर्थक की चिट्ठी, आज पार्टी को 'इंदिरा नीति' अपनाने की सख़्त जरूरत है

सेवा में
माननीय राहुल गाँधी जी
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष 
भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस पार्टी

माननीय मैं क्यों काँग्रेस पार्टी का समर्थक हूँ ये खुद मुझे ही नहीं पता है. मेरी तरह लाखों करोड़ लोग काँग्रेस पार्टी के निस्वार्थ समर्थक हैं. लेकिन महोदय आज के परिवेश में मैं और वो लाखों करोड़ लोग जो निस्वार्थ काँग्रेस पार्टी से जुड़े हैं वो अपने आप को निराश महसूस कर रहे हैं. इसका कारण 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की बुरी तरह हार वाला परिणाम नहीं है. ना ही 2014 के बाद से मिलती लगातार पार्टी की पराजय है.

ये निराशा हर प्रदेश में फैली पार्टी की गुटबाजी को लेकर है. ये निराशा आपके समीप फैले बिना जनाधार वाले नेताओं के उस जमावड़े को लेकर है, जिनको पार्टी हित की नहीं बल्कि अपने हितों की चिंता ज्यादा है. महोदय हम निराश हैं उनसे जो आपकी स्पीच तैयार करते हैं. उनको शब्दों के चयन की जानकारी नहीं है. हम मानते हैं कि आप पार्टी को उठाने की फिर से पहली जैसी काँग्रेस पार्टी बनाने की कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन इस मेहनत पर पानी फिर जाता है, जैसे कि उत्तर प्रदेश में की गयी किसान यात्रा की मेहनत पर खून की दलाली वाले बयान ने नीचे से ऊपर तक पानी फेर दिया है. अगर शब्दों के चयन में दलाली की जगह प्रचार शब्द का इस्तेमाल किया जाता तो कोई विवाद ही नहीं पैदा होता, लेकिन क्या किया जा सकता है. आपके इस शब्द ने सारा खेल बिगाड़ दिया है.

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आज पार्टी को खड़ा करना पार्टी के साथ नये लोगों को जोड़ना सबसे बड़ी चुनोती है, क्योंकि पार्टी आज भी पुराने ढर्रे से हटना ही नहीं चाहती है. मुझे ऐसा लगता है कि पार्टी आलाकमान को ये लगता है कि देश की जनता बीजेपी सरकार से परेशान हो जायेगी और 2019 में या 2024 में काँग्रेस पार्टी को दोबारा चुन लेगी, लेकिन महोदय ये सोच बड़ी गलत सोच है. इसी सोच को सोचते सोचते हम तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में सत्ता से बाहर हैं.

फिर वो ही बात कि मैं और लाखों करोड़ लोग जो निस्वार्थ भाव से काँग्रेस पार्टी से जुड़े हैं क्यों काँग्रेस पार्टी के बारे में सोचते हैं. काँग्रेस पार्टी हारे जीते हमें क्या मतलब. क्या काँग्रेस पार्टी हमको रोटी दे रही है. लेकिन फिर भी वो काँग्रेस पार्टी से अलग नहीं हो पाते हैं. ऐसा इसलिये है महोदय कि मैं और वो लाखों करोड़ लोग काँग्रेस पार्टी की उस ऐतिहासिक विरासत से जुड़े हैं जिनको काँग्रेस पार्टी को बनाने वालों ने अपने खून से सींचा था. लेकिन कुछ लोग अपने स्वार्थ के कारण पार्टी को गर्त में धकेल रहे हैं, जिसको आप समझ नही पा रहे हैं.

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इसलिये मेरा आपसे निवेदन है कि आप कुछ समझें और पार्टी को आगे बढ़ाने के लिये कुछ क्रांतिकारी कदम उठायें. आज पार्टी को इंदिरा जी की नीति अपनाने की सख्त जरूरत है, जिन्होंने नाकारा और बिना जनाधार वाले नेताओं को एक झटके से बाहर का रास्ता दिखा दिया था. आज पार्टी को हर प्रदेश में व्याप्त पार्टी की गुटबाजी को खत्म करने की सख्त जरूरत है. क्योंकि जब हम आपस में ही लड़ रहे हैं तो विरोधी से कैसे लड़ेंगे. आज हमें देश की जनता के सामने नये प्रोग्राम रखने की सख्त जरूरत है, ताकि नये और युवा पार्टी के साथ जुड़ सकें. अगर ऐसा ना हुआ तो पार्टी गर्त में ही जायेगी, ये निश्चित है।

धन्यवाद
कपिल गर्ग
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