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भारत मोदी जी के काल में ही विश्वगुरु बनेगा, पढ़िए कैसे?

- कृष्णकांत

आजकल विश्व​गुरू बनने का जैसा अभूतपूर्व प्रयास चल रहा है, वैसा पहले कभी किया ही नहीं गया. इसके अलावा मोदी जी ख़ुद ऐसे प्रतिभाशाली व्यक्ति हैं कि विश्वगुरु बनने के सारे लक्षण उनमें मौजूद हैं. अब देखिए, संघी कोलकाता में एक ‘गर्भ संस्कार’ कार्यशाला कर रहे हैं. बता रहे हैं कि गर्भ में बच्चों को सुसंस्कारी, सुंदर और गोरा बना देंगे. आईक्यू लेवल भी बढ़ा देंगे. सुपर बेबी पैदा कर देंगे. वे पेट में ही सुनिश्चित कर देंगे कि आप 'संस्कारी बच्चा' पैदा करें. इसमें माता-पिता का तीन महीने तक शुद्धीकरण किया जाएगा. फिर ग्रहों के मुताबिक संभोग होगा. गर्भवती हो जाने के बाद पूरी तरह से परहेज और प्रक्रियात्मक व सही भोजन का पालन करना होगा. पूरा मेडिकल साइंंस गया तेल लेने.

कोर्ट ने पूछा, क्या इसके पहले ऐसा हुआ है? कोर्ट को जवाब मिला था, अभिमन्यु ऐसे ही पैदा हुआ था. गर्भ में ही संस्कारी हो गया था. अब राजा दशरथ ने तो अपनी रानियों को खीर खिलाया था. हो सकता है जब हम विश्वगुरु बन जाएं तो मर्यादा पुरुषोत्तम राम की तरह बच्चा पैदा करने की गरज से संघी कहें कि नागपुर कार्यालय में रोज खीर बनेगी, जो खाएगा उसे संस्कारी बच्चा पैदा होगा.

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यह काम कोई एक कार्यशाला नहीं कर रही है. कुएं में भी भांग पड़ी है. रमेश पोखरियाल संसद में कहते हैं कि पहला परमाणु परीक्षण कण्व ऋषि ने दूसरी सदी में किया था. संघ के महान ज्ञानी पुरुष कहते हैं कि गोबर में विकिरण रोकने की क्षमता है. कुछ संघी विज्ञान कांग्रेस में पर्चा पढ़ आते हैं कि वेदों से विमान तकनीक निकलती है. इस जाहिलियत भरी ज्ञानगंगा से ही यह क्रूर आस्था भी निकलती है कि गौ माता के अपमान पर किसी को पीटकर मार दिया जाए.

बाक़ी मोदी जी ख़ुद काफी प्रतिभाशाली हैं ही. उनके पीएम बनने के बाद छपी एक किताब में बताया गया है कि बाल नरेंद्र ने मगरमच्छ के मुंह से गेंद छीन ली थी. खेलने के लिए एक मगरमच्छ भी पकड़ लाए थे और मगरमच्छ की पीठ पर बैठकर तालाब के बीचोबीच तिरंगा फहरा दिया था. 

उनकी शिक्षा दीक्षा के बारे में तो आप जानते ही हैं. मोदी जी ने 1983 में दूरस्थ शिक्षा के तहत एमए किया. उसके बाद भारतीय गणतंत्र ने उनसे प्रेरणा लेकर 1983 में दूरस्थ शिक्षा यानी डिस्टैंस लर्निंग की शुरुआत की. देश में डिस्टैंस लर्निंग शुरू नहीं हुई थी, तब तक वे इसके तहत एमए कर चुके थे. वेकैंया नायडू बता ही चुके हैं कि नरेंद्र मोदी विष्णु के अवतार हैं. विष्णु भगवान की लीला अपरंपार है. इसीलिए मोदी जी दो बार पैदा हुए. पहले सन 49 में उसके बाद 50 में. पैदा क्या हुए होंगे, अवतार लिया होगा.

मोदी जी ने बीए वगैरह नहीं किया, सीधे एमए किया. उसके पहले मालगाड़ी के डब्बे में चाय बेचते थे. गायें भैंसें और चीनी आलू के बोरे सब खूब चाय पीते थे. यह सब वैसे ही है जैसे मोदी जी तक्षशिला को पाकिस्तान से उठाकर बिहार में रख देते हैं. नरेंद्र मोदी जी ने लीला के मामले में भगवान कृष्ण को पीछे छोड़ दिया है. ऐसे चिल्लर टाइप मसलों पर उलझकर यह देश विश्वगुरु बनेगा. जिस देश में चुनाव लड़ने के लिए कोई डिग्री या शैक्षिक योग्यता निर्धारित नहीं है, जिस देश में अभी करोड़ों लोग अनपढ़ हैं, उस देश का पीएम अपनी डिग्री को लेकर रहस्य बनाए हुए है. यही तो भगवान की लीला है.

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ऐसा महान व्यक्तित्व है उनका इसीलिए उन पर देश की जनता फिदा है. भारत को हमेशा अवतार पुरुष चाहिए होता है. मोदी जी अवतार पुरुष से एक रत्ती कम नहीं हैं. उतना ही रहस्य, उतनी ही कथाएं, उतने ही गप्प, उतना ही कोलाहल, उतना ही फरेब, उतना ही झूठ, यह सब अवतारी पुरुषों के ही लक्षण हैं. अवतारी पुरुष का एक और लक्षण है कि उसकी महागाथा में कुछ भी तथ्यात्मक या वैज्ञानिक नहीं हो सकता. मोदी जी, उनकी पार्टी यह अर्हता पूरी करते हैं. 

मेरे हिसाब से अगर पीएम अनपढ़ भी हैं, या बहुत कम पढ़े हैं तो यह कोई शर्म की बात नहीं है. यह तारीफ की बात है. अगर संघी पोंगा हैं तो वे पढ़ने लिखने की शुरुआत भी कर सकते हैं, लेकिन वे ऐसा करने की अभिमन्यु पैदा करने में लगे हैं. वे खीर खाकर लड़का पैदा कराने की तकनीक खोज रहे. हीनताबोध का क्या किया जाए? यह भारतीयों की नस नस में भरा है.
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