Top Letters
recent

मेरी प्रिय, मैं अब हजार तरह के पाप, प्रायश्चित, गुनाह और दूरियां पचाने लगा हूं

-आशुतोष तिवारी

मेरी प्रिय, 
कल रात कोई पौने 11 हुआ होगा. बार की छत खुली हुई थी. पुराने बरगद का बूढ़ापन रंग बिरंगी लाइट्स की वजह से रह-रह कर बारटेंडर की मेज पर दिखाई देता है. मुझे देर रात तक खुलने वाले बिना छतों के बार बेहद आकर्षित करते हैं. आप उन में पीते हुए भी लम्बे समय तक आसमान को देख सकते हैं. आसमान कुछ देखते रहने की जरूरतों को मुफ्त में पूरी कर देता है. एक ड्रंक आदमी के लिए छतों की बोझिल आकृतियों की अपेक्षा  असीम असमान को देखना ज्यादा संगीतमय होता है.

पिया हुआ आदमी दुनिया का सबसे 'बेकसूर जानवर' होता है. खुला बार इसीलिए बेकसूर जानवरों का बाड़ा कहा जा सकता है. इस बाड़े में हर तरह के लोग अपने -अपने कसूर ले कर आते हैं. भावनाओं के हत्यारे  तो लगभग सभी होते है पर  उनमे से कुछ तो इतने खतरनाक होते हैं कि अपनी ही भावनाओं का कत्ल करके आये होते  हैं.

यह बार नहीं तर्पण घर है. यहाँ हमारे पापों का पिंडदान किया जाता है. हम अपने -अपने कोनों से अपने -अपने पाप ले कर आते हैं. सामूहिक अपराधियों का अप्रतिम आयोजन है बार और बार टेंडर इस आयोजन का पेशेवर प्रीस्ट है.

इसे भी पढ़ें...
प्रेमी के नाम एक प्रेमिका का पहला खत, मेरे लिए अब कोई जंग जीतना बाकी नहीं रहा 

मेरी प्रेमिका ! कभी तुम भी यहाँ आना. तुम ने भी तो एक गुनाह किया है. गुनाहों के देवता से प्यार करना गुनाह से कम है क्या. मैं तुम्हे वहीँ अपने किसी पाप को चबाता हुआ मिल जाऊँगा. मुझे अब उल्टियाँ नहीं होती. मैं अब हजार तरह के पाप, प्रायश्चित, गुनाह और दूरियां पचाने लगा हूँ.

आशु
Myletter

Myletter

Powered by Blogger.