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वरुण गांधी को एक 'गोबर उठाने वाले' का ख़त, आप बीमार हैं, जाइये आपको माफ़ किया !

-विकास यादव

प्रिय पारसी cum ब्राह्मण cum सिख मित्र वरुण,
सुना कि आप विराट हिन्दू बन गए हैं, अच्छा है!! पर सुनिये! हां, हम वो कौम हैं जो गोबर उठाती है। मेरी नज़र में हर वो कौम वो चाहे पाल, प्रतिहार, कुर्मी, जाट, गुज्जर, कोली, दलित, पासवान, पासी या कोई भी खेतिहर पशुपालक कौम हो अपने आप में अहीर है, यादव है; और देश का एक एक अहीर- यादव इन सब कौमों के रूह में बसता है। हम कौमें एक दूसरे के पूरक हैं।  

हां ये कौम गोबर उठती हैं, और अब सवर्णबाद, मनुवाद, सामंतवाद, ब्राह्मणवाद के खिलाफ अपने हक़ की लड़ाई लड़ती हैं। हां, हम ही वो कौमें हैं जो इस देश के minorites, दबे कुचलों की लड़ाई लड़ते हैं। क्या कीजियेगा हमारा दिल है ही इतना बड़ा, सब के लिए जगह है हमारे दिल में।    

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आपको मोदी राज में कट्टर विराट हिन्दू बनने की शुभकामनायें! बहुत बहादुरी का काम जान पड़ता है! है न? पर ऐसी भी क्या बहादुरी कि अपने ताया-ताई पे हो रहे व्यक्तिगत आरोप पे मुंह नहीं खुल रहा। 2004 में सुषमा स्वराज और उमा भारती द्वारा आपकी ताई सोनिया गाँधी को भुने हुए चने खाने और विधवा जैसी सिर मुंडा कर फर्श पे सोने की बात कहने पर भी आप खामोश रहे, आज आपके ताया शहीद राजीव गांधी पे हो रहे व्यक्तिगत हमले पे भी आप चुप हैं। 

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जब सोनिया जीे के विदेशी मूल का प्रश्न उठा तो संसद में एक शेर आवाज़ उनक सपोर्ट में गूंजी थी उनका नाम था लालू प्रसाद 'यादव', और सारी विपक्षी दलीलें फीकी पड़ गयी थीं जब उन्होंने कहा सोनिया जी देश की बहु हैं और बहु बेटियों समान होती हैं, सोनिया जी देश की बेटी हैं।  

जी हां, यादव-अहीर वो ही जो गाय भैंस के गोबर उठाने से लेकर 5 करोड़ की गाड़ियों में भी चलते हैं। गाय भैंस का दूध निकलने से लेकर सेना में गोलिया खाते हैं।  हां, हम गोबर उठाते हैं, क्योकि हमें हराम का खाना नहीं आता, हम मार्शल कौम तो हैं, पर हम उतने ही धरातल से जुड़े रहना पसंद है। हम पालनों में झूल के नहीं बने हैं, हम लड़ के भिड़ के खेतों में हल जोत के, गोबर पाथ के, बॉर्डर पे बंदूके लेके मार्च करते हुऐ बने हैं।

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होंगी हज़ार खामियां हममें, पर एक खामी इन कौमों में नहीं है वो है कायरता और हराम की खाने आदत। हम हक़ से लड़ते, हक़ से जीते, हक़ से उपजाते और हक़ से खाते, हक़ से अधिकारों की बात करने वाली कौम हैं हां, हम गोबर उठाने ली कौम हैं।  

आप जिस जातिवाद सामंती बीमारी से ग्रसित हैं, उनका इलाज भी हमारे ही पास है। जब आपके सभी साथी आपका इस्तेमाल कर के छोड़ देंगे, जब कोई रास्ता नहीं दिखता होगा तब आप बस एक अहीर को दोस्त बना लीजियेगा और आपके सारे दुःख मुसीबतें हमारी हो जाएंगी। क्या कीजियेगा हम गोबर उठाने वालों का दिल हैं ही इतना बड़ा 
"अहिर मिताई कब करे जब सब मीत मरी जाए "  
"भय चिंता वो ना करे, जाके मित्र अहीर" 

आप बीमार हैं ! 
जाइये हमने, हमारी कौम ने, हमारी जैसी हर पशुपालक गोबर उठाने वाली कौम ने, आपको माफ़ किया।  क्या कीजियेगा हम गोबर उठाने वालों का दिल हैं ही इतना बड़ा।  
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