Top Letters
recent

सोशल मीडिया पर दक्षिण पंथी 'ट्रोल आर्मी' का मुक़ाबला करने वालों के नाम एक 'देशद्रोही' का ख़ुला ख़त

-आशुतोष तिवारी

डियर देशभक्तों, 
यह आप के लिए है क्योंकि आप हर दिन सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों के जरिये देश तोड़ने वालों के खिलाफ लिखते हैं। लेकिन आप लोगो को देश तोड़ने वाले लोग ट्रोल करते हैं, गाली देते हैं, तो आप कमजोर पड़ जाते हैं।

आप कमजोर और निराश मत होइए। वह दिन भर हिन्दू मुस्लिम कर देश तोड़ने का काम करते हैं, फिर भी कमजोर नहीं पड़ते। आप तो देश जोड़ने के और सरकार से सवाल करने जैसे बेहतरीन काम मे लगे हैं, आप क्यों हतोत्साहित हों? भारत माता आप के साथ है। भगत सिंह आप की प्रेरणा हैं, आप नाहक इनसे ट्रोल होते हैं। यदि कोई सेक्युलर को 'सिकुलर' कहता है तो बीमार वह है, 'आप' नहीं। देशभक्ति क्या है -सेक्युलर होना या सांप्रदायिक होना?

इसे भी पढ़ें...
लिखना मुझे अच्छा लगता है क्योंकि लिखते हुए जीवन की तहें मेरे आगे खुलती हैं

दरअसल, भक्त बहुत क्यूट लोग होते हैं। वह देश को तोड़ने वालों के साथ जरूर है, लेकिन उनमें से कई को यह पता नहीं है। कई को बाकायदा बैठाल कर देश तोड़ना सिखाया गया है। कई फुसलाये और व्हाट्स एप के जरिये गुमराह किये गए हैं इसलिए उनसे ट्रोल मत होइए। उनके जरूर मजे लीजिये लेकिन एक काम जरूर करिए। मजे-मजे में कोई सीखना चाहे तो उन्हें सिखाइये भी कि देशभक्ति पहले है किसी नेता या पार्टी की भक्ति बाद में। 

उनको एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाइये। उनको हमारा भरण पोषण करने वाली भारत माता की कोख में गरीब विरोधी सरकार के खिलाफ बोलना सिखाइये। उनको राष्ट्र गान और राष्ट्रगीत याद कराइये। उनसे सुनिए कि देश तोड़ने वाली संस्था ने उन्हें क्या सिखाया है। उन्हें बाय बोलने की बजाय भारत माता की जय कहना सिखाइये।

इसे भी पढ़ें...
संपादक के नाम पत्र, महोदय आप पर तो देश के पत्रकारिता जगत को गर्व होना चाहिये 

आप अगर थोड़ा सा भी रिसर्च करें तो जानेंगे कि दंगा फैला कर देश तोड़ने वालों की मुख्य समस्या पढ़ना है। मेरे खुद कुछ ऐसे रिलेटिव हैं जो पढ़ने-लिखने में कभी अच्छे नहीं रहे, इसलिए अब वह पूरी तरह 'भक्त' हो चुके हैं। अगर आप उन्हें गहराई से पढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे तो वह हमारी आप की तरह देश से प्रेम करने लगेंगे, उसे तोड़ेंगे ही नहीं। कमेंट करने से पहले आपकी बात पढ़ने लगेंगे।  इतना ही नहीं वह इस बात को भी समझेंगे, उनकी ही सोच की दोनों कौम के लोगों ने किस तरह से देश को तोड़ा था।

इसे भी पढ़ें...
दै. हिंदुस्तान के एडीटर को खुला ख़त, कोई संपादक इतना निर्लज्ज कैसे हो सकता है?

इसलिए बस इतना कीजिये। उनको ज्यादा से ज्यादा अपनी फ्रेंडलिस्ट में जोड़िए। मेरी फ्रेंडलिस्ट में आधे से ज्यादा कम्युनल टाइप लोग हैं। जुबान गन्दी होने के खतरे के बावजूद उनके मुहं लगिये। उन्हें इंसान बनाइए, ताकि वह इस तरह से बात न करे, जैसे इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपस में और कमेंट बॉक्स में करेंगे। उन्हें देशभक्त बनाइये। यह आपकी जिम्मेदारी है।

जय हिंद। जय भारत।
Myletter

Myletter

Powered by Blogger.