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प्रेमिका का भावुक ख़त, मैं आपकी हूं यह अहसास ही काफी है, प्लीज मुझे माफ कर देना !



राजेश बन्छोर

प्रिय राज,

मुझे खुद को नहीं मालूम कि मैं कैसी लड़की हूं. मैं आपके दोस्ती के काबिल नहीं, फिर भी आप मुझे अपना दोस्त समझते हैं, यह सोचकर ही मुझे बहुत गर्व महसूस होता है. मुझे मालूम है कि आप कभी भी मेरे जन्मदिन को नहीं भूल सकते. जन्मदिन पर मैं आपका इंतजार करती रही, परंतु आप नहीं आए. उस दिन मैं रो रही थी. रोने का कारण मैंने किसी को नहीं बताया क्योंकि मैं बता नहीं सकती थी. मैंने अपने आप को हमेशा अकेला ही पाया है. 


मुझे हमेशा ऐसा लगता है कि मेरे गम का साथी कोई नहीं है और न ही मैं किसी को कुछ कह पाती हूं. मैं हमेशा खुश रहने की बाहरी दिखावा करती रहती हूं लेकिन मेरा मन हमेशा विचलित रहता है. मैं गिर भी जाऊं तो मुझे संभालने वाला मेरे साथ है. मैं अगर आग में जल भी जाऊं तो क्या फर्क पड़ता है. मुझे भी आपसे बातें करना अच्छा लगता है. राज, मैं आपकी भावना को समझती हूं, फिर भी आपके दिल को चोट पहुंचाती हूं, प्लीज मुझे माफ कर देना. मुझे मालूम नहीं था कि आप मुझे इतना पसंद करते हो.


राज, कोई भी किसी को भी आई लव यू कह सकता है क्योंकि हम भारतीय हैं और भारतीयों में एक दूसरे के लिए प्यार ही प्यार भरा पड़ा है. मैं हमेशा आपसे कुछ बातें करना चाहती थी लेकिन मुझे मौका ही नहीं मिला. शायद किस्मत ने साथ नहीं दिया. मैंने सुना था, आपकी शादी होने वाली है. मुझे लगा, कोई तो मिली जो आपको अच्छी तरह समझ सकेगी. आप बताइए, शादी होने के बाद अपनी पत्नी को मेरा क्या परिचय देंगे?


जो लड़की कभी किसी को थोड़ी सी खुशी नहीं दे सकती, वो भला किसी की प्रेरणा क्या बनेगी. मैंने ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे आपको थोड़ी सी भी खुशी प्राप्त हुई हो. मैंने हमेशा आपका दिल दुखाया. आपको मेरे कारण बहुत ही तकलीफ उठानी पड़ी. मेरे ही कारण आपकी नींद खराब हुई. मेरे ही कारण आपको मानसिक चोटें पहुंची. मैं कभी भी आपको यह अहसास नहीं दिला पाई कि आपके लिए मेरे मन में कितनी श्रद्धा है. लेकिन मुझ जैसी बदनसीब कोई नहीं होगी जो आपकी दोस्ती के लायक नहीं. आप जाने अनजाने की बात कर रहे हैं, मैंने तो जानबूझकर आपका दिल दुखाया है.


राज, मैं हमेशा ही बाहर से हंसती रहती हूं. हमेशा सब को महसूस होता है कि मैं कभी दुखी नहीं रहती. बाहर से मैं कितना भी मुस्कुराऊं लेकिन मेरी आंखें हमेशा नम रहती है. हमारा प्रेम निश्छल है, लेकिन प्रेम की उत्तमता सभी अपनों एवं परिवार और समाज की सीमाओं का ख्याल रखने में ही है. मैं यह कैसे भूल सकती हूं कि आपने मेरे जीवन में आशाओं के हजारों फूल खिलाए. मुझे जीवन की श्रेष्ठता से परिचित करवाया. तब आप मुझे आदर्श से लगे और धीरे-धीरे मेरा जीवन आप तक सिमट कर रह गया.


शायद मैंने कभी आपको चाकलेट खिलायी थी, लेकिन मैं इस काबिल भी नहीं थी कि आपको चाकलेट खिलाऊं. इसी कारण आपने वही चाकलेट मुझे खिलाकर उस चाकलेट की सारी मिठास कम कर दी. लिखना तो बहुत कुछ चाहती हूं, पर लिख नहीं सकती. पता नहीं मेरी किस बात से आपको ठेस पहुंच जाए. आपकी दोस्ती मैं संभाल नहीं पाऊंगी, क्योंकि मैं कभी आपकी दोस्त बनने के लायक नहीं बन सकती. आपने मुझे “पूजा” जैसा पवित्र संबोधन दिया है. यकीन मानना, आपकी पूजा इस शब्द की पवित्रता और गरिमा हमेशा बनाए रखेगी.


आप बहुत ही अच्छे हैं, मैं कभी अच्छी नहीं थी जो आप जैसे इंसान को भी दुखी करती रही. मैं आपसे बात करना चाहती हूं लेकिन कर नहीं पाती, आपको कुछ बता नहीं पाती. यकीन मानिए, मैं ऐसी हरकत कभी नहीं करूंगी जिससे आपको बुरा लगे या आपको शर्मिंदा होना पड़े. आप बेफिक्र रहिए मैं कभी किसी को मेरे घर वालों पर ऊंगली उठाने का मौका नहीं दूंगी, इससे पहले मैं मरना पसंद करूंगी. गलती होने पर क्षमा करते रहना क्योंकि मैं आपसे छोटी हूं और छोटों को माफी मांगने का हक रहता है. अंत में इतना ही कहना चाहती हूं कि मैंने आज तक प्रेम की परिभाषा समझी नहीं, मैं आपकी हूं यह अहसास ही काफी है.

आपकी शुभाकांक्षी

पूजा


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