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जात-पात के बंधन से बिना लड़े ही हार मान बैठे एक 'डरपोक' प्रेमी का पहला और आखिरी खत



- राजेश बन्छोर

प्रिय पूजा,
बहुत कुछ कहना है और कह पाना मुश्किल सा है. शायद यही कारण है कि अभिव्यक्ति के लिए कागज-कलम से बेहतर साधन नहीं खोज पाया. यह मेरा पहला और अंतिम पत्र है. इस पत्र को कागज का मामूली टुकड़ा मत समझना. यह पत्र पिछले 8 सालों के एक-एक पल का दस्तावेज है. इन बीते सालों की मुझे वह हर तारीख याद है, जब मैं तुमसे मिला, तुमसे बातें किया या तुम्हारे घर गया. इन बीते सालों में मैंने जितनी बार भगवान का नाम नहीं लिया, उससे कहीं ज्यादा बार तुम्हारा नाम लिया है. तपस्या की है मैंने, पूजा की है तुम्हारी. भले मैं तुम्हें बता न सका, पर यह तो भगवान ही जानता है कि मैं तुम्हें कितना पसंद करता हूं.

कुछ दिनों के बाद तुम्हारा जन्मदिन है. जन्मदिन की अग्रिम हार्दिक शुभकामनाएं. जन्मदिन पर मैं तुम्हारे घर आने की कोशिश करूंगा. इंसान प्यार, विश्वास और व्यवहार का भूखा होता है. यह बात भी सहीं है कि प्यार किसी लव-लेटर, ग्रीटिंग कार्ड या आई लव यू का मोहताज नहीं होता. मैं शादी का पक्षधर हो सकता हूं परंतु अंतर्जातीय विवाह में परिवार और समाज की सीमाएं सामने आकर खड़ी हो जाती है. अत: हमें आपस में दोस्ती का रिश्ता निभाना चाहिए. काश मैं तुम्हारा साथ दे पाता. काश तुम मेरी भावना समझ पाती.

तुम एक बहुत अच्छी, प्यारी और प्रखर बुद्धि की लड़की हो. तुम मेरी प्रेरणास्रोत हो. वैसे तो तुम स्वत: ही एक बहादुर लड़की हो, मैं तुम्हें क्या समझाऊं. मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि तुम हमेशा खुश रहो और जीवन की छोटी-छोटी विपत्तियों को हंसकर झेल सको. तुमने कभी मुझे चाकलेट खिलाई थी. मैं उस दिन को कभी नहीं भूल सकता क्योंकि तुम ही पहली लड़की हो जिसने मुझे आत्मीयता से चाकलेट खिलाई.

जब भी मैंने तुमसे बात की, हर बार मैंने तुम्हें मौका दिया कि अगर तुम कुछ बोलना चाहती हो तो बोल सकती हो, कुछ बताना चाहती हो तो बता सकती हो. मगर एक भी बार तुमने मुझे अपने दिल की बात नहीं बताई. जब तक तुम मुझे बताओगी नहीं, मुझे कैसे मालूम चलेगा कि तुम क्या सोचती हो, क्या चाहती हो.

इंसान गिरकर ही संभलना सीखता है, परंतु संभलने के लिए गिरना जरूरी नहीं, गिरने से पहले भी संभला जा सकता है. कुछ-कुछ बातें ऐसी होती है जिसे सिर्फ सुनकर मानना पड़ता है. हमने सुना है, आग से जल जाते हैं, इस बात को परखने के लिए हमें आग में हाथ डालने की कतई आवश्यकता नहीं होती. हमें सिर्फ सुनकर विश्वास करना पड़ता है.

मेरी कुछ बातें हमेशा याद रखना. अकेलेपन से कभी मत घबराना, क्योंकि यही वह क्षण होगा जब तुम अपने आप को परख सकोगी. कभी किसी से मत डरना. हमेशा सच्चाई का साथ देना. गलत बातों का हमेशा विरोध करना. कभी किसी को अपने घर वालों पर ऊंगली उठाने का मौका मत देना. कभी ऐसी हरकत मत करना जिससे मुझे बुरा लगे या मुझे शर्मिंदा होना पड़े. अगर जाने अनजाने में मुझसे कभी किसी भी प्रकार की कोई गलती हुई हो तो मैं क्षमाप्रार्थी हूं. अगर मेरे कारण कभी तुम्हारा दिल दुखा हो तो मुझे माफ कर देना. अंत में इतना ही कहूंगा कि “पाना ही प्रेम नहीं, तुम मेरी हो इसका अहसास ही काफी है”

तुम्हारा शुभचिंतक
राज

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