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'हमारा क्षत्रिय धर्म मुल्जिमों के समर्थन में नहीं, असहायों के साथ खड़े होने में है, न्याय देने में है, न्याय दिलाने में है'

 -उमाशंकर सिंह

मेरे मित्रों ,

मैं आप लोगों के बीच का ही एक हूँ। थोड़ी सी इतिहास की पढ़ाई की है अतः मैं कह सकता हूँ कि हम आज उसी तरह व्यवहार कर रहे हैं जैसे क्षत्रिय  राजाओं के समय सन 1200 में हुआ करता था। 1947 में जब देश का विभाजन हुआ तो मुसलमान ये समझता था कि अगर दूसरे मज़हब के बहुसंख्यकों के साथ रहा जाएगा तो उसका जीवन ख़तरे में रहेगा, मार काट होगी और उन्हें दबाया जाएगा और इसी डर में अलग देश मांग लिया और चले गए। 


इतिहास का सबसे बड़ा माइग्रेशन हुआ था उस समय, लाखो लोग मारे गए थे दोनों ही तरफ। लेकिन आज  मारकाट, बम, गोली, दमन, बलात्कार, आतंक उनके समाज में कहीं ज़्यादा है जितना वो वहां मर रहे हैं उतना यहां सबके साथ कभी न मारे जाते और न मरते।सोचिये अगर दूसरे धर्मों के लोगों से अलग होने में सुकून होता तो पाकिस्तान आज बहुत खुशहाल होता और भारत से कहीं छोटा है तो इस अनुपात में उसे अपने धर्म के लोगों के जीवन से सारी समस्याओं का अंत कर देना चाहिए था सब सुखी होते जैसे दूसरे यूरोपीय देशों में हैं मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ भारत से भी ज़्यादा वो वहां दुःख, गरीबी, भुखमरी और मौत झेल रहे हैं। 


तो समस्या कहाँ थी और समस्या कहाँ है? ये पूरी तरह से असफल एवं और घटिया मान्यता है कि चौदह सौ साल पहले जो क़ाफ़िर, यहूदी, ईसाई और दूसरे हमारे दुश्मन थे वो आज भी हैं, दरअसल अब आपकी कोई लड़ाई धर्म पर आधारित हो ही नहीं सकती। जैसे जैसे विज्ञान का विकास होगा धर्म से अंधविश्वास खत्म होता ही जायेगा और आप धर्म के सही अर्थ को समझने लगेंगे, आप मंदिर मस्जिदों से दूर होते जाएंगे और ईश्वर के करीब। 


देखते देखते छद्म धर्म समाप्त होता जाएगा  और हमारा जीवन वास्तव में ईश्वर के करीब होता जाएगा। अतः मैं आज भी मानता हूँ कि हम सबों को शिक्षा की उतनी ही आवश्यकता है जितना कि ऑक्सिजन की। आज हम सबों की हालत बहुत बुरी हो गयी है। हमारे दिमाग में एक पार्टी विशेष के द्वारा नफरत भरा जा रहा है और हमारी हालात एक रोबोट की तरह है। हमारी नफ़रत बाबर, औरंगज़ेब और तुग़लक़ पर आधारित है। जो कि उतनी ही घटिया और आधारहीन है जितनी यहूदी और ईसाई वाली दुश्मनी। 


हम सभी इस ख़्वाब में जी रहे हैं कि हमारे आसपास से मुसलमान, ईसाई और ये सब खत्म हो जाएंगे तो हमारा जीवन स्वर्ग हो जाएगा, शेर और बकरी एक तालाब में पानी पीने लगेंगे और ये सारे भाई भाई होंगे। आप पहचानिये,आपकी असल समस्या क्या है, यह जाति, छुआ छूत और इस जैसी अनेक बातें हैं। हिन्दू मुसलमान वाले मुद्दे पर अब सभी हिन्दू ख़ुद थक गए हैं क्यूंकि उस नफ़रत का कोई आधार है नहीं।बस थोड़े ही दिनों में ये धुआं हो जाएगा। मगर चूंकि अब हमें अपनी और अपने कम्युनिटी को दिन रात नफ़रत करना सिखा दिया है, ठीक वैसे ही जैसे मौलानाओं ने क़ाफ़िर और मुशरिकों से नफ़रत सिखाई थी, तो अब वो नफ़रत करने वालों को कोई न कोई चाहिए जिस से वो नफ़रत करें। 


पाकिस्तानी लोग अहमदिया, शिया, बरेलवी, देवबंदी, बोहरा आदि पंथ वालों से नफ़रत करने लगे क्योंकि ईसाई यहूदी और हिन्दू बचे नहीं वहां,वैसे ही अब आपने जिन्हें यहां नफ़रत सिखाई है वो आज नहीं तो कल आपस मे ही नफ़रत की बीस वजह ढूंढ लेंगे जैसे कि देखिये कंगना शुरू हुई थीं एक पार्टी के ख़िलाफ़, फिर मुद्दे को हिन्दू मुस्लिम बनाने लगीं मगर वो चला नहीं फिर राजपूत और मराठा मुद्दा बन गया फिर अब सारे बॉलीवुड के पीछे लग गयी हैं। सब हिन्दू हैं जिस से वो लड़ रही हैं और सारे हिन्दू ही हैं जो उनसे लड़ रहे हैं। 


यही अंग्रेजों ने कराया था और आज भी यही हो रहा है और हम सभी लोग उसके हिस्सा बनते जा रहे हैं बिना सोचे समझे। गुट अब बन चुका है हिंदुओं का हिंदुओं के ख़िलाफ़। अब बस लड़ाई ये है कि कौन ज़्यादा बड़ा हिन्दू हैं।अब सब धीरे धीरे ऐसे ही गुटों में बटेंगे क्योंकि जो नफ़रत इन्हें सिखा दी गयी है वो ये निकालेंगे ही कहीं न कहीं, अब हिंदुओं में अहमदिया, बरेलवी, शिया गुट बनेंगे यहां। असल मुद्दे अब निकालकर आ रहे हैं और वो है हिंदुओं की आपसी भीतरी नफ़रत। 


आपने सोचा है कि  सरकार हिंदुओं को हिंदुओं के ख़िलाफ़ ही न्याय नहीं दिला पा रही है, हिंदुओं का ही दमन हो रहा है, एनकाउंटर हो रहा है और अब जाति का असल मुद्दा उभर कर सामने आ चुका है सवर्ण लामबंद हो रहे हैं दलितों के ख़िलाफ़ और दलित सवर्णों के ख़िलाफ़। जिन क्षत्रियों को असहाय, मजबूर लोगों की रक्षा करनी चाहिए थी उनका एक छोटा सा समुदाय उन रेप करने वाले दुष्कर्मियों को बचाने के लिए उसी गांव में बैठक कर रहे हैं। क्या हमारा क्षत्रिय धर्म यही है? क्षत्रिय धर्म असहायों के साथ खड़े होने में है, न्याय देने में है, न्याय दिलाने में है। 


बहुत सारे लोग अपने अपने सोशल मीडिया के वाल पर फतवा जारी कर रहे हैं। आपको समझना चाहिए कि यही अब असल मुद्दा है और यही आपकी भीतरी नफ़रत है जिस पर आपको सदियों पहले काम करना चाहिए था।मुसलमानो को डिटेंशन कैम्प में डालने से आपकी समस्या का कोई समाधान नहीं  होगा। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका बहुत पहले समझ चुके हैं कि उन्हें किस मुद्दे पर और किस तरह से राज करना है। वो चाहें तो अपने देशों को ईसाई मुल्क बना दें मगर वो इन बेवकूफियों से आगे निकल चुके हैं,वो अपनी नस्लों को मार्स से लेकर दूसरे ग्रहों तक बसाने में फ़िक्रमंद हैं और आप हज़ारों साल पुरानी आदिम सोच को लागू करने पर आमादा हैं।


आप अपनी असल नफ़रत और मुद्दों पर काम नहीं करेंगे तो चाहे आप पचास हिन्दू राष्ट्र बना लें कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा बस कुछ ही सालों में सब ख़त्म हो जाएगा और वो कोई और नहीं करेगा, हम लोग ही करेंगे और इल्ज़ाम बाबर से लेकर औरंगज़ेब पर मढेंगे जैसे वो यहूदियों और ईसाईयों पर मढ़ते हैं और ऐसे धीरे धीरे हम सभी तबाह और बर्बाद होते जाएंगे। यह मैं इसलिए लिख रहा हूँ कि आप सभी असली मुद्दे को समझें और ऐसे चीजें जो लंबे समय में हमारे देश को नुकसान पहुंचा सकती हैं, उनका विरोध करें।

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