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बिहार चुनाव में हार के बाद राजद समर्थकों को एक कांग्रेस समर्थक की चिट्ठी, आईने में ठीक से अपना चेहरा देखो

-रणधीर झा

प्रिय राजद समर्थकों, 

मुख्यतः दबंग जादो जी भाइयों, (सामान्य #यादव भी नहीं). 

चुनाव परिणाम आने के बाद से ही लगातार आग मूतते आ रहे हो , और हम सामन्य कोंग्रेसी कार्यकर्ता सब कुछ सुन भी रहे हैं और बर्दास्त भी कर रहे हैं।  अब कर क्या सकते हैं जब हमारा प्रदेश नेतृत्व ही चिन्दी चोरों का समूह हो तो हमारे जैसे सामान्य कार्यकर्ता का सब कुछ बर्दास्त करना भाग्य बन गया है। लेकिन रुको, मेरा नाम रणधीर झा है और मैं मामूली कांग्रेसी हूं, जिसको पता है की तुम्हारे पार्टी और नेतृत्व का नाकारापन और निक्कमापन हमारे संगठन से एक रत्ती भी कम नहीं है और इसीलिए मैंने सोचा की ना अब और नहीं। 

अब समय आ गया है कि तुम आईने में बढ़िया से अपना मुँह कान देखो , अगर दिल करे तो थोड़ा बेहयाई छोड़ कर लाज कर लेना, वैसे उम्मीद कम है कि करोगे।  तो सुनो 

1) चुनाव कांग्रेस नहीं राजद हारी है 

2) 81 से 75 तुम हुए हो वो भी पिछली बार से बहुत अधिक सीट पर लड़ कर 

3) कांग्रेस को बहुत सीट दे दिए का बेहयापन छोड़ दो , क्योंकि तुम कभी 150 से अधिक सीट पर मजबूत संगठन रहे ही नहीं , 

4) तुमने आखिरी बार 100 सीट कब जीता था याद करके बता देना 

5) हमको (हमारे संगठन के दलालों को) को तुम वो सीट देकर एहसान छकडते हो जिसपर लोकदल, जनता दल और राजद कभी नहीं जीती, या कहें की मुकाबले में भी नहीं रही।  

6) हमारे चोर बनोल नेताओं ने, गुज्जु धंधेबाजों ने, प्रॉपर्टी डीलर नेताओं ने सीट बेचने के लिए तुमसे टिकट ले लिया, बदले में कीमत भी चुकाई (ठोस जानकारी है मुझे ) 

अब चुनाव क्यों हारे सुनो 

1) बिहार के 50% पिछड़े (नॉन यादव ) तुमको अपना नेतृत्व नहीं सौंपना चाहते 

2) उनको पड़ोस के गुंडों से बेहतर नितीश का अकर्मण्य सरकार लगता है जहाँ उनमे सुरक्षा बोध होता है 

3) दबंग यादव और दबंग मुसलमान कब का अपने अपने समूह का विश्वास खो चूका है 

4) MY अब दबंग यादव और सवर्ण मुसलमान का संगठन है यह बिहार के 60% दलित पिछड़े और 13% गैर सवर्ण मुसलमान मान चुके हैं और इसीलिए उन्हें संघ के साथ रहने वाला नितीश अधिक बेहतर ऑप्शन लगता है 

5) परिवार वाद हर जगह है परन्तु राजद और लोजपा इसका सबसे वीभत्स रूप है ये जनता जानती है और ठुकराती चली आ रही है (हमारे भी हारे) 

अब वास्तविकता ज़रूर जान लो 

1) संगठन के तौर पर तुम हमसे मज़बूत नहीं हो, जमीं पर पिछले 6 सालों से देख रहा हूँ , तुमसे विपक्ष की भूमिका का निर्वहन भी नहीं हो पा रहा है 

2)  हम जाति विशेष के झुण्ड का संगठन नहीं हैं, तुम हो इसलिए अधिक सीटें पा जाते हो 

3)  दलित पिछड़ा वर्ग तुमको अपना नेता मानने से 20 साल से इनकार कर रहा है 

4) अन्य वर्गों में तुम्हारी रूचि नहीं है इसका पता टिकटों के प्रतिशत से चलता है 

कहने का मतलब की गठबंधन में तुम बड़े भाई ज़रूर हो, परन्तु सिर्फ इसलिए क्योंकि हमारे संगठन की जिम्मेदारी चोर, बनोल, खानदानी नेता और धूर्त सबके हाथ में है अन्यथा ये ज़रूर जान लेना कि बिहार के हरेक पंचायत और गाँव में सिर्फ एक ही संगठन है जिसके समर्थक परिवार और घर ज़रूर मिल जाते हैं वो है कांग्रेस। .... 

हमारे नेता तो परजीवी बन चुके हैं तो जान बूझकर अनजान रहते हैं, तुम तो वास्तविकता जानते हो...सोचो जिस दिन हमने अपने संगठन का नेतृत्व दलित, पिछड़ों और अलपसंख्यकों के हाथ में दे दिया तब तुम कहाँ जाओगे, किसका नेतृत्व करोगे। 

माफ़ करना, तुम्हारे बकलोली से तंग आ कर लिखा ये सब, जो उतना ही सच है जितना ये की राजद अब दलित पिछड़ों और गरीबों की नहीं, दबंग जादो जी का संगठन है। धन्यवाद रहेगा (जितना मन गरिया कर छाती फुला सकते हो परन्तु सच यही है कि हारे तुम हो )

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