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तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री स्टालिन के नाम खुला खत, केंद्र का स्वभाव ही गरीब और वंचित विरोधी होता है, क्षेत्रीय पार्टियां एक बड़ी उम्मीद हैं

- पंकज के. चौधरी

डियर स्टालिन,

आपको जीत मुबारक हो। मुख्यमंत्री बनने की बधाई स्वीकार कीजिये। तमिलनाडु को एक पावरफुल मुख्यमंत्री मिल रहा है, इसकी बधाई। स्टालिन जी, कई लोग भाजपा के ख़त्म होने का कयास लगा रहे हैं। मुझे नहीं लगता है कि अभी इतनी जल्दी भाजपा ख़त्म होगी। आप का लक्ष्य होना चाहिए राष्ट्रीय पार्टिओं को औकात में रखना। 

अभी एकमात्र राष्ट्रीय पार्टी भाजपा है, और उसे औकात में रखना जरुरी है। लक्ष्य छोटा रखिये। बड़ा लक्ष्य सवर्ण सेक्युलर बिरादरी को रखने दीजिये। उनका लक्ष्य है भाजपा संघ को ख़त्म करना। इसलिए वो गांधी परिवार के साथ हैं। राहुल गांधी, सवर्ण सेक्युलर और कांग्रेस भाजपा, संघ को ख़त्म करेंगे। आप लोगों का लक्ष्य होना चाहिए कि केंद्र की सत्ता कमजोर हो। केंद्र औकात में रहे। राज्यों से केंद्र बनता है। केंद्र से राज्य नहीं। 

अब देखिये न बहुत दिनों से मैं दिल्ली से बिहार नहीं गया हूँ। केंद्र में रहता हूँ। बाढ़ पीड़ित कोसी इलाका से आता हूँ। केंद्र में बैठे बैठे ख्याल आता है कि कोसी नदी पर शॉपिंग मॉल बना दूँ। ताकि लोगों को बाढ़ से निजात मिल सके। ऐसा ही पहले भी सोचा गया होगा इसलिए किसी के मन में नदिओं को बाँधने का घटिया ख्याल आया होगा।

केंद्र है ही ऐसा। दिमाग में बहुत ही घटिया घटिया आईडिया आता है यदि आप केंद्र में बैठे हों। नदियों को जोड़ने की परियोजना भी केंद्र से ही निकलता है। राष्ट्रीय पार्टिओं, केंद्र को पावरफुल इलीट चलाते हैं। उनकी सोच एक खास तरह की होती है। उसे औकात में रखना जरुरी है। 

मैं हिंदुत्व को पूरे राष्ट्र पर थोपने को जितना खतरनाक मानता हूँ उतना ही खतरनाक हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में पूरे देश पर थोपने को भी मानता हूँ। पहले हिंदी को थोपने की बात शुरू होती है उसके बाद हिंदुत्व आता है। 

इसलिए, आप केंद्र, ऱाष्ट्रीय पार्टी, और हिंदी भाषा को थोपने के खिलाफ लड़ाई शुरू कीजिये। अब देखिये न केंद्र ने शुद्ध sanskritised हिंदी भाषा में कितने केंद्रीय स्कीम लाये हैं। उस हिंदी भाषा में जिसकी औकात बिहार से बाहर बंगाल में नहीं है। पंजाब में नहीं है। और तो और, महाराष्ट्र में भी नहीं है। 

मजबूत केंद्र, बहुसंख्यकवाद, अपनी सोच दूसरों पर थोपने की राजनीति से अलग अलग तरह से लड़ा जाना चाहिए। आप सब लोग मिलकर केंद्र की सत्ता को कमजोर कर पाए, सेक्युलर और कम्युनल राष्ट्रीय पार्टिओं को औकात में रख पाए तो बहुत बड़ा अहसान होगा लोगों पर। लोगों से मिलकर केंद्र बनता है, ये याद रखने की जरुरत है।  केंद्र ने नदी पर तटबंध बना दिया। दो तटबंधों के बीच में लोग फंस गए। अब उन लोगों को क्या फर्क पड़ता है कि केंद्र में नेहरुवियन लिबरल है या मोदियन कम्युनल?

केंद्र का स्वभाव ही गरीब और वंचित विरोधी होता है। केंद्र आज खतरनाक सिर्फ इसलिए नहीं है कि वहां मोदी बैठा हुआ है। केंद्र खतरनाक इसलिए भी है कि वहां राहुल गांधी भी बैठा हुआ है। जिसके पीछे खड़े लोगों का एकमात्र मकसद ये है कि कांग्रेस को पकड़ कर कोई वंचित समुदाय का आदमी प्रधानमंत्री बन कर खेला न कर दे। केंद्र इसलिए भी वीभत्स लगता है क्यूंकि यहाँ का एक दो कौड़ी के केजरीवाल को नवीन पटनायक से ज्यादा फुटेज मिलता है। 

इस केंद्र को हिंदी भाषा और हिंदी पट्टी के सवर्ण चलाते हैं। भारत में जितनी भी भाषाओँ में फ़िल्में बनती है, हिंदी में जितनी घटिया फ़िल्में बनती है, और किसी भाषा में नहीं बनती है, (शायद भोजपुरी भाषा को छोड़कर)। हिंदी भाषा का साहित्य सबसे औसत दर्जे का होता है। इससे अच्छा साहित्य मराठी, बंगाली, तमिल में लिखा जाता है। 

हिंदी भाषा में सबसे घटिया अखबार छपता है। सबसे औसत दर्जे के बुद्धिजीवी हिंदी भाषा से ही पैदा होते हैं। फिर भी इस भाषा को अहंकार है कि वो ही देश चलाएंगे। वो ही देश चला सकते हैं। क्यूंकि सबसे ज्यादा बोलने वाली भाषा हिंदी है। इसलिए, मैं चाहता हूँ कि आप हिंदी भाषा के खिलाफ भी आंदोलन करें और केंद्र को कमजोर करने के लिए भी प्रयासरत हों। 

मैं चाहता हूँ कि ममता बनर्जी हिंदी बोलने वाले लोगों को बंगाल में परेशान करे। उत्तर प्रदेश एक महंत को मुख्यमंत्री बना देता है और वो महंत केरल के एक पत्रकार को जेल में सड़ा देता है। केरल में भी तो उत्तर प्रदेश के लोग रहते होंगे। केरल का मुख्यमंत्री चुप क्यों बैठा है। 

आप सब लोगों को शुभकामनाएं। आप सब केंद्र को कमजोर कर पाएं और भारत के लोगों को मजबूत कर पाएं, इस आशा में।   

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