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"प्यारे देशवासियों! इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश बनने की सूचना मुझे नहीं दी क्योंकि तब मैंने अपना मोबाइल नंबर बदल लिया था"

मेरे प्यारे भाइयों और मूर्खों, 

मैं आज एक अहम जानकारी देने जा रहा हूँ । नेहरू जी ने मेरे साथ धोखा किया। हुआ यूँ कि गांधी जी चाहते थे कि मैं दांडी मार्च में सत्याग्रही बनूँ। उन्होंने मुझे एक पत्र लिख कर नेहरू जी को दिया कि आप रवीश को खोज कर पत्र दे दें। उस वक्त मैंने प्राइम टाइम से 31 मार्च तक की छुट्टी ली थी और किसी को पता नहीं था कि मैं कहाँ हूँ। गांधी जी ने मेरी बात मान कर टीवी देखना बंद कर दिया था। नेहरू जी ने इसका फ़ायदा उठा कर पत्र अपने पास रख लिया। दांडी यात्रा पर निकलने से पहले गांधी जी मेरा इंतज़ार करते रहे। 

अंत में निराश होकर यात्रा पर निकल गए। उसी दिन से व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी में नेहरू जी को लेकर जो भी मीम आता है मैं दिमाग़ बंद कर यक़ीन कर लेता हूँ। मैं सत्याग्रही नहीं हो सका। सोचा कोई नहीं बाद में हो जाऊँगा। दो मौक़े आए। इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश बनने की सूचना मुझे नहीं दी क्योंकि तब मैंने अपना मोबाइल नंबर बदल दिया था और आर के धवन का नंबर ब्लाक कर दिया था। इसलिए दांडी यात्रा के बाद दूसरी बार बांग्लादेश के निर्माण में मैं सत्याग्रही होने से बच गया। 

अगर मुझे इंदु जी ने बांग्लादेश के निर्माण में सत्याग्रही होने का मौक़ा दिया होता तो आज मैं उसी बांग्लादेश से आए लोगों के लिए NRC नहीं लाता। बाकी अभी जल्दी में हूँ। राजीव गांधी का प्लेन उड़ा रहा हूँ। कल सुबह मंडेला से मिलना है। सत्याग्रह के लिए। 

यह पत्र लिखना पड़ा। जब से पता चला है कि आप लोग मोदी जी के बयान का मज़ाक़ उड़ा रहे हैं तब से मन दुखी है। मोदी जी ने बांग्लादेश की आज़ादी के लिए सत्याग्रह किया था और जेल गए थे। इस बात में यक़ीन न करने वाले वही हैं जो पुलवामा हमले को लेकर सबूत माँग रहे थे। जाँच की माँग कर रहे थे। मज़ाक़ उड़ाने वालों को लेकर मेरी एक ही चिन्ता है। कहीं उनकी बुद्धि वापस तो नहीं आ गई है? यह ठीक बात नहीं है। मूर्खता अनमोल है। इसे हर हाल में जाने नहीं देना है। 

आपका

रवीश कुमार 

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